योग से पाएं पेट के रोगों से मुक्ति, जानें उदराकर्षणासन के चमत्कारी लाभ
नई दिल्ली। गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या की वजह से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और पेट संबंधी समस्या बढ़ने लगती हैं। ऐसे में योग और आसन के जरिए शरीर को स्वस्थ रखने जा सकता है। ऐसा ही एक आसन है उदराकर्षणासन, जो कब्ज, गैस, अपच, पेट फूलना, एसिडिटी जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है। उदराकर्षणासन एक महत्वपूर्ण योग मुद्रा है, जो विशेष रूप से पेट के निचले हिस्से, पाचन तंत्र और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। साथ ही, यह शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है।
'उदर' का अर्थ है 'पेट' और 'आकर्षण' का अर्थ है 'खींचना' या 'संकुचित करना'। यह योग की पारंपरिक क्रियाओं में से एक है, जिसमें पेट को विशेष प्रकार से दबाव और खिंचाव दिया जाता है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय और सशक्त होता है। आयुष मंत्रालय ने भी इसके महत्व पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय के अनुसार, उदराकर्षण एक ऐसा योगासन है जो मुख्य रूप से पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने, कब्ज ठीक करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक है।
यह आसन अपान वायु को उत्तेजित करता है और पेट के निचले अंगों और पीठ के निचले हिस्से के दर्द से राहत दिलाता है। यह आसान करने में अत्यंत सरल है। इसको करने के लिए योगा मेट पर सबसे पहले फर्श पर उकड़ू स्थिति में बैठ जाएं। अपने पैरों के बीच लगभग एक से डेढ़ फीट की दूरी रखें। हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें। अब गहरी सांस छोड़ते हुए दाएं घुटने को बाएं पैर के पंजे के पास जमीन पर टिकाएं और बाएं घुटने को खड़ा रखें और सिर को बाईं ओर जितना हो सके मोड़ें। रोजाना सिर्फ 5-10 मिनट इस आसन का अभ्यास करके आप अपने पेट को स्वस्थ और हल्का रख सकते हैं। अगर किसी भी व्यक्ति को पेट में अल्सर, हर्निया, गंभीर पीठ दर्द या हाल ही में सर्जरी हुई है, तो, वे इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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