अनोखे पेड़ों की अनोखी दुनियां
बच्चों, प्रकृति में सिर्फ जीव जन्तुओं में ही विचित्रता नहीं पायी जाती बल्कि इस विचित्रता से पेड़ पौधे भी अछूते नहीं। उनकी विचित्र विशेषताओं को जानोगे तो दांतों तले अंगुली दबा लोगे। अच्छा चलो, उन पेड़ पौधों की दुनियां में ये तुम्हें आश्चर्य से भर देगें। बैड वुमन:- बिना पत्तियों वाला बांह के सामान शाखाओं […]
बच्चों, प्रकृति में सिर्फ जीव जन्तुओं में ही विचित्रता नहीं पायी जाती बल्कि इस विचित्रता से पेड़ पौधे भी अछूते नहीं। उनकी विचित्र विशेषताओं को जानोगे तो दांतों तले अंगुली दबा लोगे। अच्छा चलो, उन पेड़ पौधों की दुनियां में ये तुम्हें आश्चर्य से भर देगें।
बैड वुमन:- बिना पत्तियों वाला बांह के सामान शाखाओं वाला पेड़ बैड वुमन काफी बुरा पौधा है। जैसे हम किसी को अपनी बांहों में लेकर जकड़ते हैं उस समय हमारी बाहें बंध जाती हैं, वैसी ही इसकी शाखायें एक दूसरे से बंधी रहती हैं। अगर इनकी इस जकडऩ में कोई जीव आ जाता है तो समझिए उसकी मृत्यु तय है। ये पौधे ज्यादातर मैक्सिको में पाए जाते हैं।
कैंडल ट्री:- जैसा नाम वैसा काम, यानी इसकी फलियां और कड़ी ज्वलनशील तेल युक्त होने के कारण जलने पर प्रकाश उत्पन्न करती है। यह पेड़ अमेरिका में पाया जाता है। इस पेड़ की लकड़ी को तुम मोमबत्ती की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हो।
लागला:- अगर कोई तुमसे कहे कि कोई पेड़ तुम्हारे तरह ही रोता है, है तो तुम विश्वास करोगे? हां बात सही है। लागला की रोती आवाज सुननी है तो कनेरी द्वीप की यात्र करना पड़ेगी।
ट्रैवलर्स ट्री:- यह कोई आम ट्रैवलर्स की तरह यात्रा कराने वाले पेड़ नहीं हैं बल्कि इनका नाम रख दिया गया है। मलाया और मेडागास्कर में पाए जाने वाले ये वृक्ष उत्तम आदमी को डरा सकते हैं। आंधी-तूफान की स्थिति में जब इनकी पत्तियां आपस में टकराती हैं तो अजीबोगरीब दहशत फैलाने वाली आवाज निकली है जैसे कोई भूत’ आवाज दे रहा हो।
बाओबाब:- आस्ट्रेलिया के जंगलों में पाया जाने वाला यह पौधा किसी शीशी में खोंसे गए फूलों के गुच्छों के समान दिखाई देता है। कम वर्षा वाले इलाके में पाए जाने वाला यह पौधा वहां के लोगों के लिए जलस्रोत के काम भी आता है।
कैडलंबरा:- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या दक्षिणी धु्रव प्रदेशों के जंगल में घूमते हुए अगर कोई भटक जाए तो उसे ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए बल्कि उसे कैडलंबरा की सहायता लेनी चाहिए। यह पौधा दिशा सूचक की तरह दक्षिण दिशा का ज्ञान कराता है।
है न पेड़ों की अनोखी दुनियां। अब अपने आसपास के पेड़ों पर भी नजर डालो। उनमें भी कोई न कोई विशेषता नजर आएगी, इसलिए पेड़ों को काटें नहीं बल्कि अपने तन की तरह उन्हें भी संवारें। आखिर ये हमारे जीवन हैं।
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लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
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