देश में किसान हितो के लिए एक्शन मोड में केंद्र सरकार: ओलावृष्टि से नुकसान का होगा वैज्ञानिक आकलन, बीमा क्लेम में नहीं होगी देरी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने की समीक्षा: खरीफ की तैयारी के लिए बनाया '5-जोन' फॉर्मूला, 'क्वालिटी' खेती का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कृषि भवन में देश के कृषि परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की। हाल के दिनों में कई राज्यों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को देखते हुए उन्होने स्पष्ट किया कि भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के दूसरे चरण में कृषि की रणनीति केवल कागजों या दिल्ली के वातानुकूलित कमरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टोली सीधे किसानों के पास 'खेत-स्तर' पर पहुंचेगी।
कृषि परिदृश्य को लेकर इस समीक्षा बैठक में चौहान ने कृषि सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को दो टूक कहा कि राज्यों के साथ समन्वय कर 'क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट' में तेजी लाई जाए। उन्होंने जोर दिया कि आगामी पश्चिमी विक्षोभ की चेतावनी को देखते हुए किसानों को समय पर मौसम संबंधी वैज्ञानिक सलाह पहुंचाई जाए। यदि किसान का नुकसान हुआ है, तो वैज्ञानिक तरीके से बीमे के क्लेम तुरंत बनने चाहिए। राहत की फाइलें दफ्तरों में नहीं, बल्कि सहायता किसानों के बैंक खातों में दिखनी चाहिए। दिल्ली में बनने वाली कृषि नीतियों की परंपरा को तोड़ते हुए चौहान ने घोषणा की कि अब खरीफ फसलों की तैयारी के लिए केवल दिल्ली में एक बैठक नहीं होगी। इसके बजाय, देश को उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी भारत और हिली स्टेट्स (उत्तर-पूर्व सहित) के पांच जोनों में बांटा गया है। इसके तहत 7 अप्रैल को जयपुर (राजस्थान), 17 अप्रैल को लखनऊ (उत्तर प्रदेश) और 24 अप्रैल को ओडिशा में कृषि मंथन के लिए कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। अन्य दो जोनों की तिथियां जल्द घोषित होंगी। मसलन अब खेत के स्तर तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने के लिए कृषि मंत्रालय 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' और क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इसके तहत हर फसल के लिए एक अलग रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि जोखिम प्रबंधन और प्रोक्योरमेंट रेडीनेस (खरीद की तैयारी) के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा सके।
विशेषज्ञों और सफल किसानों का संगम
इन सम्मेलनों की विशेषता यह होगी कि इसमें केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन और निजी क्षेत्र के वे प्रतिनिधि शामिल होंगे जिन्होंने प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में उत्कृष्ट कार्य किया है। इसका उद्देश्य बुआई (Sowing) से पहले किसान को सही किस्म और आधुनिक पद्धति की जानकारी देना है। मंत्री ने 'बीज से बाजार' तक की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अब हर प्रमुख फसल और हर राज्य के लिए एक अलग “कृषि रोडमैप” तैयार किया जाएगा। सोयाबीन, मक्का और नारियल जैसी फसलों पर विस्तृत चर्चा शुरू हो चुकी है, जिसमें उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता में सुधार, रोगों से मुकाबला और 'क्लीन प्लांटिंग मटीरियल' की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
दलहन आत्मनिर्भरता: 'जितना किसान बेचेगा, उतना हम खरीदेंगे'
भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मंत्री ने 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' की समीक्षा की। उन्होंने घोषणा की कि सरकार तुअर, मसूर और उड़द की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए तैयार है। इसके लिए नेफेड और सीसीएफ जैसी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसानों को बाजार में कम दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े। कृषि नीति में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए श्री चौहान ने कहा कि अब फोकस अनाज की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी होगा। उन्होंने मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध 'शरबती गेहूं' का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों को बाजार में 400 रुपये तक का प्रीमियम मिलता है। सरकार अब बायोफोर्टिफाइड और बेहतर किस्मों के बीज किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाएगी।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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