यूपी महाधिवक्ता कार्यालय आग कांड: हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (विधि) को 25 मार्च को किया तलब

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता कार्यालय में चार साल पहले लगी आग में जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं करने और प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय उ प्र को इस स्पष्टीकरण के साथ 25 मार्च को हाजिर होने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने पूछा कि जली फाइलों के पुनर्निर्माण के लिए फोटो स्टेट मशीनों को फिर से चालू क्यों नहीं किया जा सका।
कोर्ट ने कहा सरकारी अधिवक्ता कार्यालय प्रयागराज में चार साल पहले लगी आग से हजारों फाइलें जल गई थी। लापरवाही भरे रवैए के कारण जिनका पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका और केस की सुनवाई नहीं हो पा रही। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने संतोष कुमार सिंह की याचिका की सुनवाई करते समय सरकारी फाइल न होने के उत्पन्न स्थिति को देखते हुए दिया है।
कोर्ट ने मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह को बुलाया और पूछा कि यह तीसरे राउंड की याचिका है। लम्बे समय बाद केस सुनवाई के लिए लगा है। याची अधिवक्ता प्रतीक जे नागर ने बहस की। जब सरकार की बारी आई तो स्थाई अधिवक्ता ने कहा फाइल नहीं आई है, सुनवाई टाली जाय। मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकारी कार्यालय की फोटोस्टेट मशीनें हाईकोर्ट परिसर में लगी थी। हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें वहां से हटा दिया गया। इस कारण जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा है।
कोर्ट ने कहा यह समझ से परे है कि प्रमुख सचिव विधि सरकारी कार्यालय का प्रबंधन किस तरह से कर रहे हैं। फोटो स्टेट मशीन हटाई गई तो उसे अन्यत्र क्यों नहीं लगाया गया। ताकि फाइलों का पुनर्निर्माण किया जाय। कोर्ट ने कहा आये दिन ऐसा हो रहा है फाइल न होने से सुनवाई टल रही है। आग लगे चार साल बीते फिर भी जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका। याचिका की सुनवाई 25 मार्च को होगी।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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