बारामती विमान हादसे में फ्लाइट रिकॉर्डर डाटा सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज, एएआईबी की जांच जारी
नई दिल्ली। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने 28 जनवरी को बारामती में हुए लियरजेट 45 वीटी-एसएसके दुर्घटना की जांच को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। ब्यूरो के अनुसार, जांच विमान दुर्घटना एवं घटना जांच नियम, 2017 और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों, विशेष रूप से आईसीएओ अनुलग्नक 13 के तहत सख्ती से की जा रही है। एएआईबी ने बताया कि विमान में दो स्वतंत्र फ्लाइट रिकॉर्डर लगे थे। दुर्घटना के दौरान दोनों रिकॉर्डर लंबे समय तक अत्यधिक हीट के संपर्क में रहे, जिससे उनमें आग से नुकसान हुआ। इसके बावजूद जांच एजेंसी तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से प्राप्त करने की प्रक्रिया में जुटी है। एल3-संचार द्वारा निर्मित डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) का डाटा एएआईबी के फ्लाइट रिकॉर्डर प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। वहीं हनीवेल द्वारा निर्मित कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) का विस्तृत तकनीकी परीक्षण जारी है।
डाटा पुनर्प्राप्ति के लिए निर्माण देश के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि से विशेष तकनीकी सहायता भी मांगी गई है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित तकनीकी और प्रक्रियात्मक मानकों के अनुरूप, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जा रही है। एएआईबी ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखते हुए जांच के उपयुक्त चरण पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी। ब्यूरो ने सभी हितधारकों और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अटकलों से बचें और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार जांच को आगे बढ़ने दें। अधिकारियों के अनुसार, इस जांच का उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष निष्कर्ष निकालना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और विमानन सुरक्षा को ज्यादा मजबूत बनाया जा सके।
28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस त्रासदी की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की तीन सदस्यीय टीम विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) के साथ बुधवार को दुर्घटनास्थल पर पहुंची थी। एएआईबी के महानिदेशक ने भी व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल का दौरा कर लियरजेट 45 विमान के मलबे का निरीक्षण किया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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