शामली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा क्रेशर और गन्ना चरखी को लेकर जारी किए गए नए आदेश पर आर्य जाट महासभा शामली ने कड़ा विरोध जताया है। महासभा ने इस आदेश को किसान विरोधी बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है।
आर्य जाट महासभा की बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाबूराम पंवार ने कहा कि सरकार ने चीनी मिलों के 15 किलोमीटर के दायरे में क्रेशर व खंडसारी इकाइयां लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे गन्ना किसानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम किसान अपनी आर्थिक जरूरतों, पशुओं के चारे और अन्य खर्चों के लिए क्रेशर पर गन्ना डालकर नकद भुगतान प्राप्त कर लेते थे, लेकिन नए आदेश से यह सुविधा समाप्त हो जाएगी। महासभा ने आशंका जताई कि इससे किसान मिल मालिकों की मनमानी पर निर्भर हो जाएंगे और समय पर भुगतान न मिलने से गन्ना खेती से उनका मोहभंग हो सकता है।
महासभा ने सरकार से मांग की कि किसान हित में इस आदेश को स्थगित किया जाए, गन्ना किसानों को अधिक सहूलियत दी जाए तथा चीनी मिलों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही गन्ने के मूल्य में वृद्धि कर किसानों को राहत देने की भी मांग की गई। बैठक में सुनील निर्वाल, बाबूराम पंवार, राजकुमार, रामपाल देशवाल, नितिन वर्मा, नरेश मलिक, दिव्य प्रभाकर, विपिन कुमार, डॉ. ओमपाल सिंह, वीरेंद्र सिंह मौजूद रहे।