इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: बरेली डीएम और एसएसपी को अवमानना नोटिस जारी, निजी घर में नमाज रोकने पर मांगा जवाब, गांव में तनाव के बीच हिंदू परिवारों ने लगाए पलायन के पोस्टर
बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार और एसएसपी अनुराग आर्य के विरुद्ध अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया है। यह मामला विशारतगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में एक निजी घर के भीतर सामूहिक नमाज रोकने से जुड़ा है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने इस मामले में याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्यवाही पर रोक लगाते हुए अधिकारियों से 11 मार्च तक जवाब तलब किया है।
पुराने फैसले का हवाला: 'निजी परिसर में अनुमति की आवश्यकता नहीं'
अदालत ने सुनवाई के दौरान 'मरनाथ फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में दिए गए अपने पुराने फैसले का संदर्भ दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को अपनी निजी संपत्ति के भीतर प्रार्थना करने का संवैधानिक अधिकार है और इसके लिए प्रशासन की पूर्व अनुमति अनिवार्य नहीं है, बशर्ते भीड़ सार्वजनिक स्थल या सड़क पर न फैले। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यही नियम सभी अल्पसंख्यकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
मोहम्मदगंज में सांप्रदायिक तनाव: 'मकान बिकाऊ है' के लगे पोस्टर
इधर गांव में नमाज फिर से शुरू होने के बाद सांप्रदायिक माहौल गर्मा गया है। स्थानीय हिंदू परिवारों ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है। विरोध स्वरूप लगभग पांच परिवारों ने अपने घरों की दीवारों पर 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आवासीय संपत्ति को सुनियोजित तरीके से स्थायी इबादतगाह या मदरसे में बदलने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है और आवासीय ढांचे को ध्वस्त करने की अपील की है।
पुलिस प्रशासन का पक्ष: 'हालात नियंत्रण में'
विवाद बढ़ता देख गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एसएसपी अनुराग आर्य ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने कभी धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप नहीं किया है, लेकिन यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी आवासीय संपत्ति को बिना वैधानिक प्रक्रिया के सार्वजनिक पूजा स्थल में न बदला जाए। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कहा कि जब राज्य ने स्वयं स्वीकार किया है कि कोई निषेधाज्ञा लागू नहीं है, तो निजी परिसर में प्रार्थना करना अवैध नहीं माना जा सकता। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
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