ताजमहल के ऊपर दो घंटे तक मंडराया ड्रोन: पर्यटकों में मचा हड़कंप, बाद में सामने आई असलियत
आगरा: दुनिया के सात अजूबों में शुमार और देश की सबसे सुरक्षित इमारतों में से एक ताजमहल के ऊपर रविवार को एक ड्रोन उड़ते देख हड़कंप मच गया। करीब दो घंटे तक ड्रोन को मुख्य गुंबद और स्मारक के आसपास मंडराता देख वहां मौजूद पर्यटक और स्थानीय लोग दंग रह गए। सुरक्षा के लिहाज से अति-संवेदनशील क्षेत्र (नो-फ्लाई ज़ोन) होने के कारण लोगों ने तुरंत इसकी वीडियो बनानी शुरू कर दी और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे।
मचा हड़कंप, सक्रिय हुआ प्रशासन
ताजमहल जैसे संरक्षित स्मारक के ठीक ऊपर ड्रोन की मौजूदगी की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए। आनन-फानन में सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन की लोकेशन और उसे नियंत्रित करने वाले लोगों की तलाश शुरू की। एसीपी पीयूष कांत राय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर जांच की कमान संभाली।
जांच में मिली क्लीन चिट: डॉक्यूमेंट्री के लिए ली गई थी अनुमति
शुरुआती आशंका और तनाव के बीच जब पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई, तो स्थिति साफ हो गई। एसीपी पीयूष कांत राय ने बताया कि ड्रोन की उड़ान पूरी तरह से अधिकृत और वैध थी। दिल्ली के अक्षरधाम से आई एक विशेष टीम ताजमहल पर एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग कर रही थी। इसके लिए गृह मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से विधिवत लिखित अनुमति ली गई थी। टीम ने उड़ान के दौरान सभी सुरक्षा मानकों और नियमों का पूरी तरह पालन किया था।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और जागरूकता पर उठे सवाल
हालांकि यह ड्रोन उड़ान अधिकृत थी, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सूचना के आदान-प्रदान पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ताजमहल जैसे संवेदनशील स्मारक के आसपास जब ऐसी कोई विशेष गतिविधि होती है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि आम लोगों के बीच भ्रम और डर की स्थिति पैदा न हो।
फिलहाल, प्रशासन ने स्थिति साफ कर दी है, लेकिन दो घंटे तक ड्रोन का मुख्य गुंबद के पास रहना शहर में चर्चा का विषय बना रहा। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि ताजमहल की सुरक्षा को लेकर एजेंसियां कितनी सतर्क हैं।
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