होली पर लखनऊ के बाजारों में खास रौनक, सोने-चांदी की पिचकारी और बाल्टियों की बढ़ी मांग
लखनऊ। देशभर में होली के त्योहार की धूम है। रंग-गुलाल और तरह-तरह की पिचकारियों से बाजार सजे हुए हैं। वहीं, लखनऊ के बाजारों में होली कुछ अलग ही अंदाज में नजर आ रही है। जहां एक तरफ रंग-गुलाल और तरह-तरह की पिचकारियों से दुकानें सजी हैं, वहीं दूसरी तरफ सोने-चांदी की पिचकारी, बाल्टियां और लड्डू लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। आमतौर पर होली पर प्लास्टिक या लोहे की पिचकारी खरीदने का चलन रहता है, लेकिन इस बार खासतौर पर नवविवाहित जोड़ों के लिए कीमती तोहफों की मांग बढ़ी हुई है। ऐसे में लोग नवविवाहित जोड़ों को देने के लिए सोने-चांदी से बनी पिचकारी, बाल्टियां और लड्डू खरीद रहे हैं। ज्वेलर्स की दुकानों पर चांदी की पिचकारी और बाल्टी बड़े ही सुंदर डिजाइन में तैयार की जा रही हैं। कुछ लोग इन्हें सोने में भी बनवा रहे हैं।
खास बात यह है कि देने वाले और पाने वाले का नाम भी लिखवाया जा रहा है ताकि यह पहली होली की याद के रूप में हमेशा संभालकर रखी जा सके। कीमत की बात करें तो ये सामान लगभग 10,000 रुपये से शुरू होकर एक लाख रुपये तक जा रहा है। दुकानों में हर बजट के हिसाब से छोटा-बड़ा पीस उपलब्ध है। ज्वेलर अमृत जैन ने बताया कि नवविवाहित जोड़ों को पहली होली पर इस तरह का तोहफा देने की परंपरा अब काफी लोकप्रिय हो रही है। लोग इसे सिर्फ उपहार नहीं, बल्कि एक यादगार और निवेश दोनों के रूप में देख रहे हैं। कई परिवार अभी खरीदकर रख लेते हैं और फिर भविष्य में घर की शादियों पर भेंट करते हैं। जैन का कहना है कि इस बार मांग अच्छी रही है और लोगों ने इसे काफी पसंद किया है। खासकर वे परिवार जो कुछ अलग और खास देना चाहते हैं, वे सोने-चांदी की पिचकारी और बाल्टियां खरीद रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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