साक्षी महाराज का शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हमला, कांग्रेस के पिट्ठू, गुरू भी कांग्रेसी थे!
उन्नाव। भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड सांसद साक्षी महाराज ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्नाव में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान साक्षी महाराज ने शंकराचार्य को सीधे तौर पर 'कांग्रेस का पिट्ठू' करार दिया। इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है।
गुरु-शिष्य परंपरा पर उठाए सवाल
साक्षी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के राजनीतिक झुकाव पर हमला करते हुए कहा कि उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी 'विशुद्ध कांग्रेसी' थे और अब उनके शिष्य भी उसी राह पर चल रहे हैं। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के हालिया बयान, जो अक्सर राम मंदिर या हिंदू हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के विरोध में होते हैं, असल में कांग्रेस की पटकथा का हिस्सा हैं। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उसी पुराने 'कांग्रेसी चक्रव्यूह' में फंसे हुए हैं और धर्म की आड़ में राजनीति कर रहे हैं।
राम मंदिर और चुनावों के बीच बढ़ता टकराव
यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर देश का माहौल गर्माया हुआ है। गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की नीतियों और मंदिर से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों पर कई सवाल खड़े किए थे। साक्षी महाराज का यह पलटवार उसी नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है। भाजपा समर्थकों ने जहां साक्षी महाराज के इस बयान को 'साहसी' बताया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे संतों के अपमान की संज्ञा दी है।
सियासी गलियारों में छिड़ी बहस
साक्षी महाराज की इस टिप्पणी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भाजपा अब उन धार्मिक गुरुओं के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपना रही है जो सरकार की नीतियों से सहमत नहीं हैं। उन्नाव में दिए गए इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे हिंदू समाज और राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक टकराव और तेज होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि ज्योतिष पीठ की ओर से इस 'कांग्रेसी कनेक्शन' वाले आरोप पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।
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