यूपी में स्टाम्प विभाग का बड़ा एक्शन: लखनऊ से मेरठ तक अवैध संपत्तियों पर नकेल
'मिशन मोड' पर अभियान से अपंजीकृत संपत्तियों और टोल प्लाजा से खजाना भरने की तैयारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजस्व का दायरा बढ़ाने और प्रशासनिक पारदर्शिता को नई गति देने के लिए कमर कस ली है। स्टाम्प एवं निबंधन विभाग ने प्रदेश भर में एक विशेष अभियान छेड़ दिया है, जिसका लक्ष्य सरकारी संस्थाओं की अपंजीकृत संपत्तियों का पंजीकरण करना और लंबित स्टाम्प शुल्क की वसूली करना है।
योगी सरकार प्रदेश के राजस्व संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टाम्प एवं निबंधन विभाग विशेष अभियान चलाकर अपंजीकृत संपत्तियों के पंजीकरण, लंबित स्टाम्प वादों के निस्तारण और विभिन्न संस्थाओं से देय स्टाम्प शुल्क की वसूली पर जोर दे रहा है। अभियान का उद्देश्य राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ संपत्ति लेनदेन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के इस अभियान के तहत विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी जैसी संस्थाओं की उन संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है, जिनका अब तक पंजीकरण नहीं हुआ है। विभाग का मानना है कि इन संपत्तियों के पंजीकरण से राजस्व में भारी उछाल आएगा। इसके साथ ही, स्टाम्प दरों को बाजार की वास्तविक स्थितियों के अनुरूप करने के लिए एक व्यापक सर्वे भी शुरू किया गया है।
मार्च 2026 तक 200 करोड़ का लक्ष्य
यूपी में विभिन्न जिलों के विकास प्राधिकरणों की बड़ी परियोजनाओं से सरकार को भारी कमाई की उम्मीद है। विभाग की ओर से राजस्व बढ़ाने के लिए विभिन्न जिलों में विशेष कार्ययोजनाएं भी बनाई गईं हैं। इनमें मेरठ के निजी बिल्डरों और आरआरटीएस परियोजना से 252 करोड़ रुपये, गाजियाबाद में हरनंदीपुरम और यूपीएसआईडीसी की परियोजनाओं से 153 करोड़ रुपये, गौतमबुद्धनगर में यमुना और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से 93 करोड़ रुपये तथा गोरखपुर में जीडीए की न्यू टाउनशिप से 100 करोड़ का राजस्व की कमाई करने का लक्ष्य है। वहीं मुरादाबाद में एमडीए की सहायक और गोविंदपुरम आवासीय योजनाओं से लगभग 22 करोड़ रुपये, वाराणसी में वीडीए की गंजारी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से करीब 40 करोड़ रुपये तथा जीआईडीए के लीज और फ्रीहोल्ड विलेखों से लगभग 50 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। इन सभी स्रोतों से मार्च 2026 तक करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
प्रदेश में एनएचएआई के 123 टोल प्लाजा रडार पर
सरकार ने अब एनएचएआई के टोल प्लाजाओं की भी गहन पड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेश में स्थित 123 टोल प्लाजा के समझौतों का परीक्षण करने के बाद विभाग ने लगभग 72 करोड़ रुपये की स्टाम्प देयता निर्धारित की है। गाजियाबाद और कुशीनगर जैसे जिलों में पहले ही वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इन मामलों में विभिन्न न्यायालयों में वाद दर्ज किए गए हैं और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। गाजियाबाद में एक मामले का निस्तारण करते हुए लगभग 70 लाख रुपये की वसूली की गई है, जबकि कुशीनगर में दो मामलों में लगभग 52 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया चल रही है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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