विधानसभा में गूंजा थानेदारों की मनमानी का मुद्दा, नेता प्रतिपक्ष ने कहा एसपी सुन लेते हैं पर दरोगा नहीं उठाते फोन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में उस समय एक दिलचस्प लेकिन गंभीर स्थिति पैदा हो गई जब नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर अपनी व्यथा साझा की। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने थानों के प्रभारियों पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिले के पुलिस कप्तान यानी एसपी तो एक बार फोन सुन भी लेते हैं, लेकिन थानेदारों के पास जनप्रतिनिधियों का फोन उठाने की फुर्सत नहीं है।
सदन को संबोधित करते हुए माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सदन की मर्यादा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि कार्यपालिका के अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को सुनें। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि थानेदार थानों में बैठकर अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं लेकिन जनहित के मुद्दों पर किए गए फोन को नजरअंदाज कर देते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने इसे सदन की अवमानना के समान बताया और कहा कि जब सदन की ओर से कोई व्यवस्था दी जाती है तो अधिकारियों को उसका अनुपालन करना ही चाहिए क्योंकि वे भी शासन की व्यवस्था का एक अनिवार्य अंग हैं।
उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री से विशेष अनुरोध किया कि सदन में लिए गए निर्णयों और निर्देशों को निचले स्तर के अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सरकार इस संबंध में कड़े आदेश जारी करे ताकि थाने स्तर के अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन उठाने की शिष्टता दिखाएं और उनकी समस्याओं पर गौर करें। गौरतलब है कि इससे पूर्व सत्ता पक्ष के भी कुछ विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस के रवैये को लेकर नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद अब नेता प्रतिपक्ष के इस बयान ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।
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