आजाद अधिकार सेना ने पूर्व PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री पर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत राष्ट्रपति व NHRC को भेजी
मेरठ। आजाद अधिकार सेना ने उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में तैनात रहे पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट (PCS अधिकारी, 2019 बैच) अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लगाए गए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर भारत के महामहिम राष्ट्रपति तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को विस्तृत एवं औपचारिक शिकायत पत्र प्रेषित किया है। संगठन ने इस प्रकरण में संवैधानिक संज्ञान लेते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि अलंकार अग्निहोत्री द्वारा 26 जनवरी 2026 को पद से त्यागपत्र देने के पश्चात सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह भारतीय संविधान, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का स्पष्ट उल्लंघन है।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने त्यागपत्र में UGC के नए नियम 2026 (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations) को “काला कानून” बताया था तथा प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार का विरोध किया था। इसके पश्चात उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोपों में शामिल हैं-
बिना किसी विधिक/न्यायिक आदेश के हाउस अरेस्ट / नजरबंदी भारी पुलिस बल एवं PAC द्वारा सरकारी आवास को घेरकर आवागमन पर रोक
मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक व्यवहार एवं भय का वातावरण रात के समय अज्ञात स्थान पर ले जाने की आशंका, जिससे व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा
प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग एवं भेदभावपूर्ण रवैया
इसके अतिरिक्त, अग्निहोत्री द्वारा कुछ प्रशासनिक निर्णयों में सामाजिक एवं धार्मिक भेदभाव तथा उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों में संभावित अन्याय के मुद्दे भी सार्वजनिक रूप से उठाए गए हैं, जो सामाजिक सद्भाव एवं संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। आजाद अधिकार सेना ने महामहिम राष्ट्रपति से इस पूरे प्रकरण पर संवैधानिक हस्तक्षेप करने तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतः संज्ञान लेकर स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। साथ ही, जांच अवधि के दौरान श्री अलंकार अग्निहोत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने हेतु संबंधित शासन/प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया गया है।
इस अवसर पर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने कहा-
> “यह मामला किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। यह इस सवाल से जुड़ा है कि क्या आज संवैधानिक पद पर कार्यरत अधिकारी भी भयमुक्त होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन कर पा रहे हैं। यदि एक PCS अधिकारी के साथ बिना न्यायिक आदेश ऐसी कार्रवाई संभव है, तो आम नागरिक की स्वतंत्रता और सुरक्षा की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। यह विधि के शासन और लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है।” आजाद अधिकार सेना ने स्पष्ट किया कि संगठन संविधान, मानवाधिकार और विधि के शासन (Rule of Law) के पक्ष में खड़ा है। इस प्रकरण में सत्य का सामने आना लोकतंत्र और देशहित के लिए अनिवार्य है।
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