मेरठ: जिला अस्पताल में 'गैस संकट', लकड़ियों के चूल्हे पर बन रहा मरीजों का खाना, दावों की खुली पोल

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। एक ओर जहां प्रशासन जिले में रसोई गैस की सुचारू आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के मुख्य जिला अस्पताल की रसोई पिछले 4 दिनों से गैस किल्लत की मार झेल रही है। अस्पताल में रसोई गैस खत्म होने के कारण भर्ती मरीजों के लिए भोजन तैयार करने में भारी संकट खड़ा हो गया है।
आधुनिक रसोई में 'धुआं और लकड़ी'
जिला अस्पताल, जहां सैकड़ों की संख्या में मरीज उपचाराधीन हैं, वहां पिछले 96 घंटों से एलपीजी (LPG) सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरन अस्पताल के रसोइयों को मरीजों के लिए सुबह और शाम का खाना लकड़ियों के चूल्हे पर बनाना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर से आए एक वीडियो ने प्रशासन के दावों की हकीकत बयां कर दी है, जिसमें रसोइया धुएं के बीच चूल्हे पर रोटियां और सब्जी तैयार करता नजर आ रहा है।
मरीजों की सेहत और समय पर सवाल
अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए समय पर पौष्टिक आहार मिलना उनके उपचार का हिस्सा होता है। लेकिन चूल्हे पर खाना बनने के कारण न केवल भोजन तैयार होने में देरी हो रही है, बल्कि धुएं और स्वच्छता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रसोई विभाग से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि गैस रिफिल के लिए बार-बार सूचित किए जाने के बावजूद अब तक आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है।
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मेरठ के अन्य हिस्सों में भी गैस की किल्लत की खबरें आ रही हैं, लेकिन एक सरकारी अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्था होना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा कर रहा है। जहां एक ओर अधिकारी 'सब कुछ ठीक है' का राग अलाप रहे हैं, वहीं जिला अस्पताल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में भारी आक्रोश है।
बड़ा सवाल: कौन है जिम्मेदार?
अस्पताल प्रबंधन अब इस मामले में चुप्पी साधे हुए है, लेकिन यह स्थिति गंभीर संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कितनी जल्दी गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कराता है।
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