'1947 में पाकिस्तान छूटा, 2001 में मेरठ': मैनकाइंड फार्मा के मालिकों का वो दर्दनाक किस्सा, राजनाथ के राज पर अखिलेश को घेरने की कोशिश
भतीजे के 45 दिनों के अपहरण ने बदल दी थी 'मैनकाइंड' की किस्मत; तथ्यों के फेर में फंसी राजनीति
मेरठ/दिल्ली। देश की दिग्गज दवा कंपनी 'मैनकाइंड फार्मा' (Mankind Pharma) की सफलता की कहानियाँ तो सबने सुनी हैं, लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक ऐसा खौफनाक काला अध्याय भी छिपा है जिसने इस परिवार को अपनी जड़ें उखाड़ने पर मजबूर कर दिया था। हाल ही में कंपनी के मालिक रमेश जुनेजा का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने मेरठ छोड़ने के अपने दर्द को साझा किया। दिलचस्प बात यह है कि इस दर्द भरे किस्से को वर्तमान में योगी सरकार की सुरक्षा बनाम अखिलेश सरकार के 'जंगलराज' के दांव-पेंच के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि इतिहास के पन्ने कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
यह साल 2001 की बात है, जब मेरठ के औद्योगिक गलियारों में जुनेजा परिवार का बड़ा नाम था। अचानक एक दिन रमेश जुनेजा के भाई के बेटे (भतीजे) का अपहरण कर लिया गया। वह कोई आम अपहरण नहीं था; मासूम को 45 दिनों से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया। फिरौती और जान के डर ने परिवार को इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने मेरठ को हमेशा के लिए अलविदा कहने का फैसला कर लिया। रमेश जुनेजा बताते हैं, "मेरी माता जी अक्सर कहती थीं कि 1947 के बंटवारे में हमें पाकिस्तान ने निकाल दिया और 2001 के दौर ने हमें मेरठ से निकाल दिया।"
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वर्तमान राजनीतिक माहौल में इस घटना को समाजवादी पार्टी के शासनकाल के 'गुंडाराज' से जोड़कर पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसे योगी सरकार की तारीफ और अखिलेश सरकार की आलोचना के रूप में वायरल किया जा रहा है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि साल 2001 में उत्तर प्रदेश की कमान भारतीय जनता पार्टी के ही हाथ में थी। उस समय राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे (अक्टूबर 2000 से मार्च 2002 तक), जिनके बाद राम प्रकाश गुप्ता ने कार्यभार संभाला था। ऐसे में यह घटना उस दौर की लचर कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, जिसे आज की राजनीति अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल कर रही है। यह अपहरण मेरठ के कुख्यात सुधीर भदौड़ा गैंग (Sudhir Bhadaura Gang) ने किया था। सुधीर गैंग ने उस समय दास मोटर्स समेत और भी कई अन्य बड़े अपहरण किये थे।
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अपहरण की उस खौफनाक घटना के बाद ही मैनकाइंड फार्मा ने अपना पूरा ऑपरेशन मेरठ से दिल्ली स्थानांतरित कर लिया था। जुनेजा परिवार का कहना है कि उस समय माहौल ऐसा था कि जान बचाना ही प्राथमिकता थी। आज योगी सरकार के दौर में सुरक्षा के दावे करते हुए रमेश जुनेजा कहते हैं कि अब माहौल बदल गया है, लेकिन उनके अतीत का वह घाव आज भी यूपी की सियासत में 'सुरक्षा' के मुद्दे पर एक बड़ी बहस का केंद्र बना हुआ है।
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