मेरठ का कपसाड़ कांड: मुख्य आरोपी घोषित हुआ नाबालिग, अब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJ Board) में होगी मामले की सुनवाई
अधिवक्ताओं के पैनल की दलीलें कोर्ट में पड़ी भारी; वारदात के वक्त 17 साल का था आरोपी, मेरठ कोर्ट ने जेजे बोर्ड को ट्रांसफर किया केस
मेरठ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित मेरठ कपसाड़ कांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। सोमवार को न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी को वारदात के वक्त नाबालिग (जुवेनाइल) स्वीकार कर लिया है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई साधारण अदालत के बजाय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJ Board) द्वारा की जाएगी।
क्या था पूरा मामला ?
मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में बीते 8 जनवरी को एक दलित युवती के अपहरण की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस दौरान विरोध करने पर आरोपी ने युवती की मां सुनीता पर बलकटी से जानलेवा हमला कर दिया था, जिनकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने हत्या और अपहरण का मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था।
कानूनी दांवपेंच और उम्र का विवाद:
आरोपी की ओर से तीन अधिवक्ताओं—संजीव राणा, बलराम सोम और विजय शर्मा के पैनल ने कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि हाईस्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार आरोपी की जन्मतिथि 11 मई 2008 है। इस आधार पर वारदात के दिन आरोपी की उम्र 17 साल 7 महीने और 25 दिन थी। हालांकि, वादी पक्ष ने प्राथमिक शिक्षा के सर्टिफिकेट्स के आधार पर आरोपी को बालिग साबित करने की कोशिश की, लेकिन कक्षा 5 के प्रमाण पत्र में भी वही जन्मतिथि पाई गई।
कोर्ट का फैसला:
लगातार चली सुनवाई और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद, सोमवार (9 फरवरी) को कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों और सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग को मजबूत मानते हुए केस को जेजे बोर्ड में ट्रांसफर करने का आदेश सुना दिया। अधिवक्ता संजीव कुमार राणा ने बताया कि न्यायहित में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है और अब वे जेजे बोर्ड में भी अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
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