मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के सपनों पर चला 'सुप्रीम' हथौड़ा, व्यापारी मायूस, अब सिर्फ चमत्कार का सहारा
38 साल की मेहनत मिट्टी में मिलने का डर, सदमे में व्यापारी; सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश पर लगाई अंतिम मुहर
मेरठ। मेरठ के दिल कहे जाने वाले शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए सोमवार की सुबह किसी कयामत से कम नहीं रही। सुप्रीम कोर्ट ने इलाके के शेष अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के अपने पुराने आदेशों को सही ठहराते हुए ध्वस्तीकरण की संभावनाओं पर अंतिम मुहर लगा दी है। इस फरमान के बाद पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा है और व्यापारियों की आंखों में अपने भविष्य को लेकर गहरा अंधेरा और नमी दिखाई दे रही है।
बाजार के बुजुर्ग व्यापारी किशन गिरधर की आवाज कांप जाती है जब वे कहते हैं, "यह आदेश हमारे हित में नहीं है। 38 साल से यहाँ दुकान चला रहे हैं। अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इसी मिट्टी में लगा दी। अब इस उम्र में हमें कौन काम देगा और हम कहाँ जाएंगे?" यह केवल किशन गिरधर का दर्द नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की चीख है जिनकी रोजी-रोटी इन दुकानों से जुड़ी है।
सांत्वना के वादे पड़े फीके, अब अपनों से भी टूटा भरोसा
आपको याद होगा कि अक्टूबर 2025 में जब दुकानों पर बुलडोजर चला था, तब सांसद अरुण गोविल और कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने व्यापारियों के बीच पहुँचकर भरोसा दिलाया था कि अब कोई दुकान नहीं टूटेगी। मास्टर प्लान में संशोधन और 'बाजार स्ट्रीट' जैसे फार्मूलों की उम्मीद जगाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की हालिया सख्ती ने इन तमाम राजनीतिक वादों को खोखला साबित कर दिया है। व्यापारियों को अब न नेताओं पर भरोसा रहा और न अपनी तकदीर पर।
आवास विकास परिषद ने कसी कमर, 6 सप्ताह में देनी है रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि अवैध निर्माणों को न गिराना न्यायालय की अवमानना है। कोर्ट ने आवास एवं विकास परिषद से 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि विभाग अब कोर्ट की सख्ती के बाद रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है।
इतिहास की एक चूक और वर्तमान की बर्बादी
यह विवाद 1986 में शुरू हुआ था, जब यह जमीन आवासीय उपयोग के लिए आवंटित की गई थी। कागजों पर नोटिस-नोटिस का खेल चलता रहा और देखते ही देखते यहाँ 22 दुकानों से बढ़कर 1478 अवैध निर्माण खड़े हो गए। आज वही कागजी नोटिस बुलडोजर बनकर उन लोगों के सामने खड़े हैं, जिन्होंने सालों-साल यहाँ मेहनत की।
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