भारत के अमेरिका से समझौते पर बोले राकेश टिकैत - सस्ते अमेरिकी उत्पादों से बर्बाद होंगे देश के किसान
भारत-अमेरिका एग्रीकल्चर ट्रेड डील को भाकियू ने बताया 'डेथ वारंट', देशव्यापी आंदोलन का आह्वान; एमएसपी व्यवस्था पर मंडराया खतरा
मुजफ्फरनगर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित 'एग्रीकल्चर ट्रेड डील' को लेकर किसान संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए 'डेथ वारंट' करार देते हुए इसके खिलाफ देशव्यापी आवाज उठाने का आह्वान किया है। भाकियू का कहना है कि यह डील लागू होने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसान परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
70 प्रतिशत आबादी पर बड़ा प्रहार टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डील देश की 70 प्रतिशत आबादी पर सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका में कृषि क्षेत्र को भारी सब्सिडी दी जाती है, जबकि भारत का किसान पहले से ही कर्ज और बढ़ती लागत से परेशान है। ऐसे में अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करना छोटे और सीमांत किसानों के लिए नामुमकिन होगा।
खाद्य सुरक्षा और एमएसपी को खतरा भाकियू प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि इस समझौते से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था कमजोर होगी और खेती पर कॉरपोरेट का नियंत्रण मजबूत हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की सहमति और उनके हितों के संरक्षण के बिना कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाकियू ने सभी किसान संगठनों से इस 'डेथ वारंट' के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है।
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