राहुल के बयान पर लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही स्थगित,जानिए क्या था वो बयान जिस पर छिड़ा विवाद
कैलाश पर्वत पर क्या हुआ उस पर अपनी बात रखना चाहते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। चीन की सेना कैलाश की चोटी की तरफ बढ रही थी। उनके बार-बार चीन के मामले को उठाने पर सत्तापक्ष की ओर से कई सदस्यों ने खड़े होकर विरोध किया। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी पहले की बात को ही दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वह पहले की बात को नहीं दोहरायेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्री गांधी के भाषण के बीच हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता जो कह रहे हैं उसका आधार क्या है। वह पूरी तरह काल्पनिक बातें कर रहे हैं इसलिए इस विषय पर रोका जाना चाहिए। गांधी ने फिर से अपनी बात रखने की कोशिश की तब श्री रिजिजू ने कहा कि देश को नीचा दिखाकर आपको क्या फायदा मिलने वाला है। एक ऐसी बात कर रहे हैं जिसका यहां कोई औचित्य नहीं है। सदन में ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए जिससे सेना को मनोबल गिरे। राहुल गांधी उस विषय के बारे में बात कर रहे हैं जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन नियम प्रक्रियाओं से चलेगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें। आसन की व्यवस्था की लगातार आप अवमानना कर रहे हैं। सरकार की नीतियों पर बोलें। अगर सेना की आलोचना करेंगे तो यह उचित नहीं है। सदन में उन तथ्यों को बोलें जो देशहित हैं।
गांधी ने कहा कि सेना का हर जवान वास्तविकता को जनता है। उसके बाद सदन में भारी हंगामा हो गया जिसके कारण कार्यवाही को चार बजे तक स्थगित कर दी गयी। इससे पहले गांधी ने अपने भाषण के दौरान एक पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित पुस्तक के हवाले से भारत चीन सीमा पर डोकलाम के संदर्भ में कुछ कहने का प्रयास किया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी मैगजीन के हवाले से सदन में कोई बात कहना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर विपक्ष के नेता सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच नोकझोंक होने लगी। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कहा सदन के नियमों का उल्लेख करते हुए व्यवस्था दी कि सदन में किसी अखबार की कटिंग, पत्रिका या किसी पुस्तक में प्रकाशित बातों के आधार पर कोई सदस्य अपनी बात नहीं रख सकता।
इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह तथा संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी श्री सिंह की आपत्ति का समर्थन किया और कहा कि विपक्ष के नेता को किसी पत्रिका के आधार पर अपनी बात सदन में रखने का अधिकार नहीं है। इस बीच दोनों पक्ष के सदस्यों ने नियमों का हवाला दिया जिस पर श्री बिरला ने कहा कि वह जो व्यवस्था दे रहे हैं वह नियमों के आधार पर है और सभी सदस्यों को उसका पालन करना चाहिए।
श्री शाह ने कहा कि रक्षा मंत्री सिर्फ इतना ही पूछ रहे हैं कि जिस पुस्तक को उद्ध़त किया जा रहा है वह छपी ही नहीं है तो वह कहां से उल्लेख कर रहे हैं। उनका कहना था कि खुद विपक्ष के नेता कह रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है। श्री शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता को बोलने का अधिकार है लेकिन जब अध्यक्ष ने व्यवस्था दी है तो उसका पालन किया जाना चाहिए, विपक्ष के नेता किसी अन्य की लिखी बातों को नहीं बोल सकते। वह नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि जब अध्यक्ष व्यवस्था दे चुके हैं तो विपक्ष के नेता को उसका पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के नेता की बात सुनने के लिए सदन में बैठे हैं इसलिए उन्हें नियम के तहत बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन नियम से चलता है और यदि विपक्ष के नेता व्यवस्था को नहीं मानते हैं और अध्यक्ष बार बार व्यवस्था दे चुके हैं और विपक्ष के नेता तब भी व्यवस्था को मानने को तैयार नहीं हैं तो इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब विपक्ष के नेता नहीं मानते हैं तो नये सदस्यों से नियमों का पालन कराना कठिन हो जाएगा इसलिए अध्यक्ष को नियम बनाने चाहिए कि सदन कैसे चलेगा।
रक्षा मंत्री के फिर आपत्ति जताने के बावजूद जब श्री गांधी ने बार बार उसी तथ्य का उल्लेख करने का प्रयास किया तो सदन में हंगामा तेज हो गया। इस पर अध्यक्ष ने श्री गांधी को रोका और कहा कि किसी भी सदस्य को आसन का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने विपक्ष के नेता को चेतावनी दी कि वह व्यवस्था का पालन करते हुए अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि यदि वह मनमानी करते हैं तो ऐसे में सदन नहीं चल सकता। व्यवस्था का पालन सभी सदस्यों को करना है और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो वह दूसरे सदस्य को बोलने के लिए बुला लेंगें।
हंगामे के बीच भाजपा के डॉ निशिकांत दुबे ने भी नियमों का उल्लेख करते कहा कि अखबार की कटिंग या किताब या अप्रमाणिक विषय का उद्धरण नहीं दिया जाना चाहिए। अध्यक्ष ओम बिरला ने भी श्री गांधी से कहा कि सदन में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत है और जो प्रामाणिक है उसी का उल्लेख किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को नियमों का पालन करना चाहिए।
श्री बिरला ने तीखे लहजे में कहा कि अध्यक्ष ने व्यवस्था बता दी है और उसको चुनौती नहीं दी जा सकती है इसलिए विपक्ष के नेता को अपनी बात में पुस्तक या किसी अखबार की कटिंग का उल्लेख नहीं करना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि जब अध्यक्ष व्यवस्था दे चुके हैं तो विपक्ष के नेता को उसका पालन करना चाहिए।
श्री गांधी ने कहा कि वह सिर्फ भाजपा नेता सूर्या के उठाए सवालों का जवाब दे रहे हैं यदि वह मुद्दे नहीं उठाते तो वह उसका उल्लेख नहीं करते लेकिन श्री बिरला ने कहा कि भाजपा सांसद ने जो मुद्दे उठाए हैं वे सब पहले से ही संसद की कार्यवाही में है और यदि ऐसा नहीं होता तो वह उनको भी बोलने की अनुमति नहीं देते। उनका कहना था कि सभी सदस्यों को नियमों और मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि चीन का मुद्दा बहुत संवेदनशील है और उस पर बोलने की श्री गांधी को इजाजत दी जानी चाहिए।
कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने कहा कि नियम है कि सदन में नियम 349 के तहत संवेदनशील मुद्दों को पत्रिका में छपे लेख को उद्धृत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के नियम सिर्फ विपक्ष के सदस्यों के लिए हैं ऐसा प्रतीत होता है। जब श्री गांधी ने कहा कि वह पुस्तक का उल्लेख नहीं करेंगे लेकिन उसको लेकर चर्चा तो कर सकते हैं, इस पर अध्यक्ष ने कहा कि उस मुद्दे का जिक्र नहीं किया जा सकता है। उनका कहना था कि विपक्ष के नेता अध्यक्ष की दी गयी व्यवस्था का उल्लंघन करते हैं तो यह भी अनुचित है और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। जब श्री गांधी ने कहा कि अध्यक्ष ही बता दें कि उन्हें क्या करना चाहिए। इस पर श्री बिरला ने कहा कि वह उनके सलाहकार नहीं हैं लेकिन अध्यक्ष होने के नाते उनका दायित्व है कि सदन नियमों से चले। विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी है कि वह सदन को नियम से चलने में सहयोग करें। उनका कहना था कि यदि विपक्ष के नेता व्यवस्था को नहीं मानते हैं और कुर्सी का अपमान करते ही रहते हैं तो यह उचित नहीं है।
विपक्ष के नेता ने कहा कि वह भारत और चीन के संबंधों के बारे में वह बोलना चाहते हैं इस पर भी बोलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। श्री गांधी ने कहा कि सत्ता पक्ष विपक्षी दल पर, विपक्ष के चरित्र पर टिप्पणी करते हैं उनको बोलने दिया जाता है लेकिन उनको रोका जा रहा है। श्री गांधी ने जब पहले की तरह ही बोलना शुरु किया तो अध्यक्ष ने फिर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा लगता है कि विपक्ष के नेता सदन में कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नियम 353 के तहत जो व्यवस्था है उसमें यदि किसी व्यक्ति का नाम लेते हैं तो उसकी अनुमति लेनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सदन नियम प्रक्रिया से चलेगा बार बार आसन की अवमानना से नहीं चलेगा और यदि विपक्ष के नेता नहीं बोलना चाहते हैं तो वह अगले वक्ता का नाम पुकारेंगे। उनका कहना था कि सबको बोलने का अधिकार है लेकिन नियम प्रक्रिया के तहत और तथ्यों, पर बोलना पड़ेगा। सदस्यों को नीतियों पर बोलने और आलोचना करने का अधिकार है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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