"लोकसभा में गरजे तेजस्वी सूर्या: मोदी सरकार के 12 वर्षों को बताया 'ईमानदार शासन का दशक'
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के बंगलूरू (दक्षिण) सांसद तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में अपने भाषण में यूपीए शासनकाल के दौरान राष्ट्रपति के भाषण में सरकार की कई मोर्चों पर विफलताओं के लिए बहानेबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय राष्ट्रपति के भाषणों में लगातार बहानेबाजी और विफलताओं का उल्लेख होता था, जबकि मोदी सरकार ने चुनौतियों के बावजूद परिणाम दिए हैं। कमजोर नेतृत्व बहाने बनाता है। वहीं, महान नेतृत्व चुनौतियों के बावजूद परिणाम देता है। यही कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य अंतर है।
तेजस्वी सूर्या संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार का 12वां वर्ष है और राष्ट्रपति का यह अभिभाषण अमृतकाल के दूसरे दशक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज भारत वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है और युवाओं को नई आकांक्षाओं के लिए पंख दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और इटली जैसे लोकतंत्रों में कई नेता आए और चले गए, लेकिन मोदी लगातार तीसरी बार भारी बहुमत से सत्ता में लौटे हैं। यह उनकी गवर्नेंस और डिलीवरी का प्रमाण है।
सूर्या ने यूपीए सरकार के राष्ट्रपति अभिभाषणों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भ्रष्टाचार और घोटालों का बोझ गरीबों पर पड़ता था। साल 2011 में राष्ट्रपति ने कहा था कि गरीबों तक योजनाओं के लाभ पूरे स्तर पर नहीं पहुंच रहे। इसके विपरीत 2026 में राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता और ईमानदारी को संस्थागत बनाया है और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से 6.75 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाए हैं।
उन्होंने कहा कि यूपीए के 10 साल उच्च महंगाई और कम विकास दर के थे। हर अभिभाषण में वैश्विक मंदी और घरेलू कारणों को बहाना बनाया जाता था। जबकि आज राष्ट्रपति कहती हैं कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और महंगाई नियंत्रण में है। कमजोर नेतृत्व चुनौतियों को बहाना बनाता है, जबकि महान नेतृत्व चुनौतियों के बावजूद परिणाम देता है। यही कांग्रेस और भाजपा के बीच का फर्क है। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय आतंकवादी घुसपैठ, नक्सली हिंसा और ब्लास्ट आम थे। उस समय मौतों की संख्या घटने को उपलब्धि बताया जाता था। जबकि आज राष्ट्रपति कहती हैं कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। नक्सली हिंसा अब केवल 8 जिलों तक सीमित है, जबकि पहले 126 जिलों में फैली थी।
उन्होंने कहा कि यूपीए के समय हमेशा कश्मीर हिंसा और आतंकवाद से जुड़ा होता था, जबकि 2014 के बाद अनुच्छेद 370 हटने के बाद विकास और युवाओं की नई शक्ति का प्रतीक बन गया है। सूर्या ने कहा कि यूपीए ने महिला आरक्षण बिल के लिए वर्षों तक वादा किया लेकिन पास नहीं किया, जबकि मोदी सरकार ने इसे लागू किया। यूपीए के अभिभाषणों में मंदिरों, भाषाओं और धरोहरों का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि मोदी सरकार ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल, राम मंदिर और चारधाम जैसे कार्य किए।
उन्होंने कहा कि पहले युवाओं का सरकारी नौकरी ही लक्ष्य होती थी, लेकिन आज स्टार्टअप, एंटरप्रेन्योरशिप और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे शब्द आम हो गए हैं। यूपीए के भाषणों में इनका कोई उल्लेख नहीं था। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि विकसित भारत का सपना यूपीए के समय कहीं नहीं था, जबकि आज राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसे स्पष्ट रूप से रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत आज नए आर्थिक क्रांति के कगार पर है। पिछले 10 साल नींव रखने के थे, अब सुधारों की गाड़ी पूरी गति से चल रही है।
उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाएगा। उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन की लगातार हारों पर कहा कि उन्हें हार की अग्रिम बधाई दी जा सकती है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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