भारत-पाक क्रिकेट विवाद : विपक्ष ने बीसीसीआई से पूछा, 'आतंकी हमलों के बाद भी क्यों खेल रहा था भारत?'
नई दिल्ली। पाकिस्तान के भारत के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से मना करने पर विपक्ष के नेताओं ने बीसीसीआई और भारत सरकार से सवाल किए हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हम लोगों को पहले ही खेलने के लिए मना कर देना चाहिए था, पता नहीं क्यों भारत खेलने जा रहा था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "भारत सरकार को अपनी विदेश नीति पर विचार करना पड़ेगा कि किस दिशा में उनकी विदेश नीति जा रही है।"
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, "'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान को भारत के खिलाफ खेलने से रोक देना चाहिए था। उस समय हमने सवाल उठाया था कि भारत क्यों खेल रहा है। शुरू से ही मेरा पक्का मानना था कि जब से पहलगाम हमला हुआ, भारत को उनके खिलाफ खेलने से मना कर देना चाहिए था। हमें इस मुद्दे को ग्लोबल लेवल पर उठाना चाहिए था कि हम कोई मैच नहीं खेलेंगे।"
उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी भारत उनके खिलाफ खेला। यहां तक कि आईसीसी भी इतना लाचार है कि वह पाकिस्तान के साथ सख्ती नहीं बरत रहा है। अगर पाकिस्तान ऐसा कुछ करता है तो आईसीसी को उस पर बैन लगा देना चाहिए। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत सरकार और आईसीसी को इस पर ध्यान देना चाहिए। भारत को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "यह बीसीसीआई के मुंह पर सबसे बड़ा तमाचा है। बीसीसीआई दुनिया की सबसे पावरफुल और सबसे अमीर क्रिकेट बॉडी है और आईसीसी की मेंबर है। आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, हमने बार-बार दुनिया भर में आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका का मुद्दा उठाया। जिन 26 लोगों की जान गई, उनके परिवार लगातार अपील करते रहे कि पाकिस्तान के साथ मैच नहीं खेले जाने चाहिए।"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "सच कहूं तो, यह बहुत शर्मनाक है कि दोनों तरफ से खेल का इस तरह से राजनीतिकरण किया गया है। मुझे नहीं लगता कि मुस्तफिजुर (बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान) को कोलकाता में खेलने का कॉन्ट्रैक्ट देने से मना किया जाना चाहिए था। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। राजनीति का दखल, मुझे लगता है कि बांग्लादेश की प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा थी, लेकिन यह उसी का एक नतीजा भी है और पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।"
उन्होंने कहा कि यह पूरी बात हाथ से निकलती जा रही है। मुझे लगता है कि हमें सच में यह समझने की जरूरत है कि खेल, खासकर क्रिकेट जैसा खेल जो सभी लोगों के लिए इतना मायने रखता है, कम से कम खेल के मैदान पर हमें एक साथ लाने का जरिया होना चाहिए, न कि इसे ऐसे ही चलने दिया जाए। मुझे सच में लगता है कि यह अब सभी संबंधित लोगों के लिए एक वेक-अप कॉल है कि वे इमरजेंसी बेसिस पर एक-दूसरे से संपर्क करें, आईसीसी इसके लिए प्लेटफॉर्म हो सकता है। बस करें, आप हमेशा ऐसे नहीं चल सकते।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, "पाकिस्तान जानता है कि वह जीत नहीं सकता। इसलिए उसने अपनी इज्जत बचाने के बारे में सोचा। जब बैसरन (पहलगाम की घाटी) में 26 लोग मारे गए थे, तब भारत के पास एक बड़ा मौका था। भारत को तब वर्ल्ड कप में नहीं खेलना चाहिए था। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाता कि हम आतंकवादियों के खिलाफ हैं और पाकिस्तान सबसे बड़ा आतंकवादी देश है।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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