सरकार से बगावत, सनातन से सम्मान! शंकराचार्य ने अलंकार को दिया ‘सरकारी पद से ऊंचा’ ऑफर
बरेली। उत्तर प्रदेश की सियासत इस वक्त भूचाल की स्थिति में है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री के अचानक इस्तीफे और निलंबन के बाद अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे मोर्चा संभाल लिया है।
सरकार ने अलंकार का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया। यहीं से मामला प्रशासनिक विवाद से निकलकर सीधे सियासी अखाड़े में बदल गया।
निलंबन के बाद सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं अलंकार को फोन किया। उन्होंने अलंकार का अभिनंदन किया और धर्म के क्षेत्र में उन्हें ऊंचा पद देने का भरोसा दिलाया। शंकराचार्य ने कहा, “आपके कदम का सनातन समाज अभिनंदन करता है। हम चाहते हैं कि आपके जैसे लोग सनातन की सेवा में आगे आएं। जो पद सरकार ने दिया था, उससे ऊंचा पद आपको देंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह लड़ाई सिर्फ अफसर बनाम सरकार की नहीं रही, बल्कि यह बन चुकी है — शंकराचार्य बनाम सरकार और सनातन बनाम सिस्टम। रथ से स्नान विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन पर हैं और अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा इस सियासी चिंगारी को और भड़काने वाला मोड़ साबित हुआ है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अलंकार अब सिस्टम से टकराकर सनातन के नए चेहरे बनते दिख रहे हैं। शंकराचार्य का यह ऑफर सरकार के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है। विपक्ष भी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने में जुट गया है और अब पूरे प्रदेश में सवाल उठ रहे हैं — क्या अविमुक्तेश्वरानंद बनाम सरकार की लड़ाई और ज्यादा भड़कने वाली है
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