सहारनपुर का एक आदर्श गांव, जहां कोई नहीं खाता तंबाकू, शराब, प्याज, लहसुन, मांस…. आज लगेगा वार्षिक मेला
ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध नगर देवबंद के करीब 11 हजार की आबादी के गांव मिरगपुर में बुधवार 15 फरवरी को बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर वार्षिक मेले का आयोजन होगा। देवबंद से छह किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे ऊंचे टीले पर बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी बनी हुई है। करीब 400 साल पूर्व सम्राट […]
ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध नगर देवबंद के करीब 11 हजार की आबादी के गांव मिरगपुर में बुधवार 15 फरवरी को बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर वार्षिक मेले का आयोजन होगा।
देवबंद से छह किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे ऊंचे टीले पर बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी बनी हुई है। करीब 400 साल पूर्व सम्राट जहांगीर के शासनकाल के दौरान राजस्थान निवासी सिद्ध पुरूष बाबा फकीरादास घूमते-घूमते इस गांव में आए थे।
उन्होंने गांववासियों को संदेश दिया था कि वे यदि सात्विक भोजन को अपनाएंगे तंबाकू, शराब, प्याज, लहसुन, मांस, अंडा, सिरका आदि का सेवन नहीं करेंगे तो वे हमेशा खुशहाल रहेंगे। बाबा फकीरादास कुछ समय के लिए इस गांव में रूके थे और उन्होंने गांव वालों को कई तरह के चमत्कार दिखाकर उनका विश्वास अर्जित किया था।
ये भी पढ़ें सहारनपुर: मण्डी पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, 380 ग्राम चरस बरामदगांव वालों के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा उत्पन्न हो गई थी। मिरगपुर वासियों ने गुरू बाबा फकीरादास की कही बातों को अपने जीवन में हमेशा के लिए उतारने का संकल्प लिया था। जिसका ये गांव आज भी अनुसरण कर रहा है।
पूर्व ब्लाक प्रमुख चौधरी प्रविंद्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता विरेंद्र चौधरी, चौधरी ओमपाल सिंह, प्रगतिशील किसान चौधरी मैनपाल सिंह, अमित गुर्जर मिरगपुर ने बताया कि हर वर्ष फागुन माह की दशमी को गुरू पर्व के मौके पर बाबा फकीरादास की सिद्ध कुटी पर सालाना मेला लगता है।
इसमें पहुंचने वाले लोगों की खातिरदारी गांववासी देशी घी के हलवे और शुद्ध मावे के पेड़े से करते हैं। सिद्ध कुटी पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट जाती है और शाम तक वहां उनके पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है।
अपनी इन विशेषताओं के कारण भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत देशभर में अनूठी मिसाल बना मिरगपुर गांव करोड़ों लोगों को सात्विक खानपान और नशामुक्ति का संदेश देता है। यह गांव भारत के राष्ट्रपति से आदर्श गांव का सम्मान प्राप्त कर चुका है और इंडिया बुक आफ रिकॉर्डस में भी दर्ज है।
इस गांव में रहने वाले करीब 90 फीसद लोग हिंदू गुर्जर बिरादरी के हैं। जो खेतीबाड़ी में बहुत उन्नत और प्रगतिशील हैं। मुख्य रूप से इस गांव में गन्ने और गेहूं की खेती होती है। बलशाली और हस्टपुष्ट मिलनसार स्वभाव के मिरगपुर के लोगों को उनकी विशिष्ट पहचान के कारण बेहद सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है।
देवबंद और दूर-दराज से लोग बुद्धवार को यहां लगने वाले मेले में श्रद्धापूर्वक भाग लेंगे। सुरक्षा आदि व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में पुलिस के चाक-चौबंद इंतजाम रहेंगे। गुर्जर बिरादरी समेत अन्य राजनीतिक दलों और बिरादरियों के जनप्रतिनिधि भी फकीरादास की सिद्ध कुटी पर बने मंदिर में पहुंचकर सिर नवाते हैं और प्रसाद का आनंद लेते हैं।
इस दिन गांववासियों की सभी बहू-बेटियां भी गांव में अपने परिवारों में इस खास मौके पर उपस्थिति दर्ज कराना अपना फर्ज मानती हैं।
महंत संत पद्मश्री स्वामी कल्याण देव जी महाराज इस गांव की सात्विकता से बहुत प्रभावित रहे हैं। उनका इस गांव और ग्रामीणों से भारी लगाव रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राजेश पायलट, पूर्व मंत्री स्व. यशपाल सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. चौ. नारायण सिंह का भी इस गांव से भारी लगाव रहा और वो भी हमेशा यहां के वार्षिक मेले मे बढ़-चढ़कर भागीदारी किया करते थे।
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