बलिया में एसडीएम को कुत्ते ने काटा तो अंगूठा लगाकर मांगनी पड़ी छुट्टी
बलिया। बलिया के बैरिया तहसील के एसडीएम ने अंगूठा लगाकर छुट्टी का आवेदन किया है जो चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अंगूठे वाले इस आवेदन पर जिलाधिकारी ने उनकी छुट्टी स्वीकृत कर दी है। दरअसल, बैरिया के एसडीएम आलोक प्रताप सिंह को एक पालतू कुत्ते ने काट लिया था। जिस हाथ से वे लिखते हैं ,उसी की अंगुलियों में ज़ख्म होने के कारण एसडीएम अलोक प्रताप सिंह दस्तखत करने में असमर्थ हैं,जिसके बाद उन्होंने डीएम मंगला प्रसाद सिंह को अपनी छुट्टी का एप्लीकेशन भेजा है। जिसकी तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल है। एसडीएम अलोक प्रताप ने अवकाश आवेदन में खुद को दैनिक क्रियाएं करने में असमर्थ बताया है।
उन्होंने लिखा है कि वे हायर मेडिकल सेंटर जाकर इलाज कराना चाहते हैं।क्योंकि हाथों में कुत्ते के काटने से खून का रिसाव बंद नहीं हो रहा है।
ये भी पढ़ें मिडिल ईस्ट संकट से शेयर बाजार में हड़कंप: सेंसेक्स-निफ्टी 3% लुढ़के, निवेशकों के डूबे अरबों रुपएउल्लेखनीय है कि एसडीएम आलोक सिंह ने बैरिया में हो रहे कई गैरकानूनी कामों पर नकेल कसी थी। इस वजह से भी उनके इस तरीके से मेडिकल लीव पर जाने को लेकर लाेग चर्चा कर रहे हैं। वहीं, इस सम्बन्ध में डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने रविवार को बताया कि बैरिया के एसडीएम की छुट्टी तीन दिन पहले ही एप्रूव्ड कर दी गई है। कुत्ते के काटने के कारण वे लिखने में असमर्थ हैं। यह सामान्य प्रक्रिया है। नौकरीपेशा लोगों के लिए अवकाश की व्यवस्था की गई है, जिसका उपयोग उन्होंने किया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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