पापा-दादा चपरासी, बेटी बनी IAS: बुलंदशहर की शिखा और गाजीपुर की प्रियंका की प्रेरक कहानी..UPSC में लहराया परचम
"अब साहब की नहीं, बेटी की गाड़ी चलाऊंगा" - भावुक हुए SDM के ड्राइवर पिता, बेटी ने UPSC में मारी बाजी
बुलंदशहर/गाजीपुर । बुलंदशहर की शिखा और गाजीपुर की प्रियंका ने यह साबित कर दिया है कि यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा पास करने के लिए संसाधनों से ज्यादा संकल्प की आवश्यकता होती है।
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शिखा की सफलता की कहानी पीढ़ियों के संघर्ष का फल है। उनके परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण रही है, लेकिन शिक्षा को लेकर उनका दृष्टिकोण हमेशा ऊंचा रहा। शिखा के दादा और पिता दोनों ने चपरासी (Peon) के पद पर रहकर परिवार का भरण-पोषण किया। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने शिखा की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। बुलंदशहर के एक छोटे से गाँव से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुँचना शिखा के लिए आसान नहीं था। उन्होंने सीमित संसाधनों में अपनी तैयारी पूरी की। उनकी जीत उन सभी लड़कियों के लिए एक मिसाल है जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखती हैं।
गाजीपुर की प्रियंका: पिता हैं SDM के ड्राइवर, अब बेटी चलाएगी प्रशासन
गाजीपुर की प्रियंका ने यूपीएससी परीक्षा में 79वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता के बाद उनके पिता के शब्द सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। प्रियंका के पिता एक एसडीएम (SDM) के ड्राइवर हैं। उन्होंने सालों तक अधिकारियों की गाड़ियाँ चलाईं और उन्हें सैल्यूट होते देखा। रिजल्ट आने के बाद भावुक पिता ने कहा— "अब तक साहब की गाड़ी चलाई, अब अपनी बेटी की गाड़ी चलाऊँगा।"
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प्रियंका ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक के बाद पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। उन्होंने साबित किया कि अगर इरादा पक्का हो, तो सामाजिक और आर्थिक स्थिति सफलता में बाधा नहीं बन सकती।
इन दोनों की सफलता से मिलने वाली 3 बड़ी सीख
संसाधन नहीं, संकल्प मायने रखता है
दोनों ही बेटियों के पास आलीशान कोचिंग या बहुत पैसा नहीं था, लेकिन उनके पास कड़ी मेहनत करने का अटूट इरादा था।
माता-पिता का अटूट विश्वास
चपरासी और ड्राइवर जैसे छोटे पदों पर काम करने के बावजूद, पिताओं ने समाज की परवाह किए बिना अपनी बेटियों को पंख दिए।
धैर्य और निरंतरता
यूपीएससी का सफर लंबा होता है। शिखा और प्रियंका दोनों ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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