बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की सजा-ए-मौत का फैसला जारी, कोर्ट ने संपत्ति जब्त कर पीड़ितों में बांटने का दिया आदेश
ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को सुनाई गई सजा-ए-मौत का विस्तृत लिखित फैसला जारी कर दिया है। कुल 457 पन्नों के इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले में जुलाई-अगस्त 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलन को कुचलने की हिंसक कार्रवाई को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया गया है।
दो मुख्य आरोपों में दोषी लिखित फैसले के अनुसार, शेख हसीना पर दो मुख्य चार्ज तय किए गए थे। पहले चार्ज में उन्हें छात्रों को उकसाने और रंगपुर में पुलिस फायरिंग में हुई मौतों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं, दूसरे चार्ज में ड्रोन से प्रदर्शनकारियों को ट्रैक करने, सावर में शवों को जलाने और हत्याओं को रोकने में विफल रहने के लिए 'फांसी की सजा' मुकर्रर की गई है।
भारत से प्रत्यर्पण की मांग तेज शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में रह रही हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की है। दूसरी ओर, शेख हसीना ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को राजनीति से प्रेरित बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है, विशेष रूप से उनकी गैर-मौजूदगी (Trial in Absentia) में सुनाई गई मौत की सजा पर सवाल उठाए गए हैं।
