मुजफ्फरनगर के सोनू कश्यप को मेरठ में ईंटों से पीटा और फिर जिंदा जलाया, 80 हजार की लूट का आरोप, गरमाई ओबीसी बनाम ठाकुर की राजनीति
मेरठ/मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर निवासी 26 वर्षीय सोनू उर्फ रोनू कश्यप की मेरठ के ज्वालागढ़ में हुई नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अब यह मामला 'ओबीसी बनाम ठाकुर' की राजनीति का अखाड़ा बन गया है। जहाँ परिजनों का आरोप है कि सोनू को 80 हजार रुपये लूटने के बाद जिंदा जलाया गया, वहीं पुलिस इसे केवल एक नाबालिग टेंपो चालक के साथ हुआ विवाद बता रही है।
पुलिस की थ्योरी और परिजनों के सवाल मेरठ पुलिस के अनुसार, टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर हुए विवाद के बाद एक 16 वर्षीय नाबालिग (ठाकुर बिरादरी) ने सोनू की हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जला दिया। पुलिस ने आरोपी को बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन परिजनों और कश्यप समाज के नेताओं का कहना है कि यह एक सोची-समझी हत्या है जिसमें कई लोग शामिल थे। परिजनों का सवाल है कि वह 80 हजार रुपये कहाँ गए? केवल एक नाबालिग इतनी बड़ी वारदात को अकेले कैसे अंजाम दे सकता है?
मुजफ्फरनगर से लखनऊ तक गरमाई राजनीति इस हत्याकांड के बाद नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद मुजफ्फरनगर पहुँचे, जहाँ पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और भारी हंगामा हुआ। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि प्रशासन बिरादरी के आधार पर अपराधियों को संरक्षण दे रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे 'PDA' समाज पर हमला बताया है, वहीं मायावती ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। कांग्रेस ने भी इस मामले में नाराजगी जताई है।
परिवार का इकलौता सहारा था सोनू सोनू मुजफ्फरनगर के मोहल्ला किला का निवासी था और मुंबई में हलवाई का काम करके घर चलाता था। घर में उसकी बूढ़ी बीमार माँ, एक अविवाहित बहन और बीमार बड़ा भाई है। पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी। वह अपनी शादी के लिए लड़की देखने गाँव आया था, लेकिन इस दर्दनाक अंत ने परिवार को सड़क पर ला दिया है। कश्यप समाज ने 18 जनवरी को बड़ी शोक सभा का ऐलान किया है और 50 लाख मुआवजे व सरकारी नौकरी की मांग की है।
