पीएसीएल (पर्ल्स ग्रुप) घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई.. दिल्ली और पंजाब में 5,046 करोड़ रुपये की 126 संपत्तियां जब्त

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल लिमिटेड) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए 5046.91 करोड़ रुपए की 126 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। कुर्क की गई संपत्तियां मुख्य रूप से पंजाब और दिल्ली में स्थित हैं और इन्हें निवेशकों के धन से खरीदा गया बताया गया है। ईडी ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 19 फरवरी 2014 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।
यह एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत दर्ज की गई थी। इसके बाद में सीबीआई ने 33 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दाखिल किए। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम 2002 के तहत की गई है। जांच में सामने आया कि पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों ने एक अवैध सामूहिक निवेश योजना के जरिए देशभर में लाखों लोगों से 48,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई। निवेशकों को कृषि भूमि खरीद और विकास के नाम पर लुभाया गया। उन्हें ‘कैश डाउन पेमेंट’ व किस्तों के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और कई भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया और उनकी रकम भी वापस नहीं की गई।
ईडी के अनुसार, इस धोखाधड़ी को छिपाने के लिए कई मुखौटा कंपनियों और ‘रिवर्स सेल ट्रांजेक्शन’ का सहारा लिया गया। इससे अवैध रूप से अर्जित धन को इधर-उधर स्थानांतरित कर वैध दिखाने की कोशिश की गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में सेबी को पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि पीएसीएल लिमिटेड की संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों को उनका पैसा लौटाया जा सके। हालांकि जांच में बाद में यह भी सामने आया कि कंपनी की संपत्तियों का अवैध इस्तेमाल जारी था।
इस संबंध में पंजाब, जयपुर और बेंगलुरु में अतिरिक्त एफआईआर भी दर्ज की गईं। ईडी ने 2016 में ईसीआईआर दर्ज कर 2018 में पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में चार पूरक शिकायतें दायर की गईं। विशेष पीएमएलए अदालत इन सभी पर संज्ञान ले चुकी है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस मामले में कुल 22,656.91 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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