मुजफ्फरनगर में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों का गुस्सा, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर गहरी चिंता जताई है और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है। मोर्चा ने इस समझौते से भारतीय किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए पांच प्रमुख मांगों के साथ राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत की कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ है। मोर्चा ने पांच प्रमुख मांगें राष्ट्रपति के सामने रखी हैं:
कृषि उत्पाद जैसे बादाम, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि को भविष्य के सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से स्थायी रूप से बाहर रखने की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जाए।
डेरी उत्पाद जैसे चीज़, मिल्क पाउडर और प्रोटीन आदि पर अमेरिका द्वारा दी जाने वाली भारी सब्सिडी के कारण भारतीय किसानों को नुकसान न हो, इसके लिए इन्हें नियंत्रित किया जाए।
किसी भी कृषि संबंधी व्यापार समझौते को लागू करने से पहले किसान संगठनों की सहमति अनिवार्य हो।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद किसानों की आय सुरक्षित रहे।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए, जिससे वे वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हों।
चौधरी शाह आलम ने कहा कि यह कदम न केवल किसानों के हित में है, बल्कि देश की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए भी अहम है।
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