सरकार ने खाद का दुरुपयोग रोकने के लिए जारी किए 14,692 नोटिस, 6 हजार से अधिक लाइसेंस रद्द
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मौजूदा फसल सीजन के दौरान खाद के डायवर्जन और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, खरीफ और चल रहे रबी सीजन 2025-26 (अप्रैल-जनवरी 2026 के मध्य) के दौरान 14,692 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,373 लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किए गए और 766 एफआईआर दर्ज की गईं।
सरकार का मकसद किसानों के हितों की रक्षा करना और राष्ट्रीय खाद सप्लाई चेन में पारदर्शिता बनाए रखना है। सरकार ने राज्य सरकारों और जिला-स्तरीय अधिकारियों ने एक बड़ा अभियान चलाया, जिसमें निरीक्षण, छापे और कानूनी कार्रवाई शामिल थी। खाद विभाग ने कृषि और किसान कल्याण विभाग के साथ मिलकर यह अभियान चलाया।
शनिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये सक्रिय और कड़े कदम खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं, बाजार में अनुशासन मजबूत करते हैं और पूरे देश में वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। सरकार ने यह भी साफ किया कि असंतुलित खाद के बुरे असर सिर्फ मिट्टी की क्वालिटी तक ही सीमित नहीं हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है और सेहत को भी खतरा हो सकता है।
बयान के अनुसार, पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी में उगाई गई फसलों में जानवरों के चारे के लिए जरूरी मिनरल्स की कमी होती है, जिससे जानवरों की सेहत और प्रोडक्टिविटी पर बुरा असर पड़ता है। इस तरह, पोषक तत्वों का असंतुलन लंबे समय तक चलने वाले खेती-बाड़ी सिस्टम की स्थिरता और दक्षता में एक बड़ी रुकावट है।
सरकार ने टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी की सेहत को बहाल करने और बनाए रखने के लिए संतुलित खाद को एक मुख्य रणनीति के तौर पर बढ़ावा दिया है। 'सॉइल हेल्थ कार्ड' स्कीम के जरिए किसानों को उनकी जमीन में पोषक तत्वों की स्थिति और भौतिक स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। फसलों के लिए रासायनिक उर्वरक, बायोफर्टिलाइजर, जैविक इनपुट और मिट्टी के ट्रीटमेंट के सही इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन भी दी जाती हैं।
जुलाई 2025 तक इस स्कीम के तहत 93 हजार से अधिक किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, लगभग 6.8 लाख फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और हजारों जागरूकता अभियान चलाए गए थे। नवंबर 2025 के मध्य तक, देशभर में 25.55 करोड़ से अधिक 'सॉइल हेल्थ कार्ड' बांटे जा चुके थे, जो संतुलित पोषक तत्व मैनेजमेंट को बढ़ावा देने में स्कीम के बड़े असर को दिखाता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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