आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ तीसरी तिमाही में घटकर 11,318 करोड़ रुपये
नयी दिल्ली। निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक का एकल शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में सालाना आधार पर 4.02 प्रतिशत घटकर 11,318 करोड़ रुपये रह गया। बैंक ने शनिवार को वित्तीय परिणामों की घोषणा की। उसने बताया कि तिमाही के दौरान उसका कुल राजस्व दो प्रतिशत बढ़कर 49,334 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसमें ब्याज से प्राप्त आय 41,966 करोड़ रुपये रही।
वहीं, ब्याज पर बैंक का खर्च घटकर 20,034 करोड़ रुपये रह गया। गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के मामले में बैंक की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सकल एनपीए का अनुपात एक साल पहले के 1.96 प्रतिशत से घटकर 31 दिसंबर 2025 को 1.53 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए का अनुपात 0.42 फीसदी से कम होकर 0.37 प्रतिशत रह गया। बैंक के पास औसत जमा सालाना 8.7 प्रतिशत बढ़कर 15,86,088 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। औसत चालू खाता-बचत खाता अनुपात 39 प्रतिशत दर्ज किया गया। घरेलू ऋण 11.5 प्रतिशत बढ़कर 31 दिसंबर 2025 को 14,30,895 करोड़ रुपये हो गया। इसमें खुदरा ऋण में 7.2 प्रतिशत और कंपनियों को दिये गये ऋण (बिजनेस बैंकिंग पोर्टफोलियो) में 22.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गयी। ग्रामीण इलाकों में ऋण पोर्टफोलियो 4.9 प्रतिशत और घरेलू कॉर्पोरेट ऋण 5.6 प्रतिशत सालाना बढ़ा है।
आईसीआईसीआई बैंक के निदेशक मंडल ने प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप बक्शी को दो साल के लिए पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। पुनर्नियुक्ति 04 अक्टूबर 2026 से 03 अक्टूबर 2028 तक के लिए होगी।
बैंक के कार्यकारी निदेशक अजय कुमार गुप्ता को भी 27 नवंबर 2026 से 26 नवंबर 2028 तक पुनर्नियुक्त करने के प्रस्ताव को निदेशकमंडल की मंजूरी मिली है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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