‘नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया', विपक्ष के दावे पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने दिया जवाब
नई दिल्ली। 'लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एलपीजी संकट पर बोलने नहीं दिया गया।', विपक्ष के इस दावे पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने पलटवार करते हुए कहा कि वे जिस मुद्दे को लेकर बोलना चाहते थे, उन्हें समय दिया गया। लेकिन, वे मुद्दों से भटक जाते हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमने एक बार फिर विपक्ष के नेता को पार्लियामेंट के सभी नियमों और कानूनों को तोड़ते हुए देखा है। आज, राहुल गांधी ने एलपीजी की कमी पर चर्चा के लिए समय मांगा। स्पीकर ने समय दिया, लेकिन एक बार फिर, हमने देखा कि कैसे उन्होंने मुद्दे की गंभीरता को नज़रअंदाज किया और गैर-जिम्मेदारी दिखाई। स्पीकर ने बार-बार कहा है कि हमें जिस टॉपिक पर चर्चा हो रही है, उसी पर टिके रहना चाहिए।
ये भी पढ़ें आयकर विभाग ने 22 राज्यों में 62 रेस्त्रां पर छापे मारे, 408 करोड़ का राजस्व छिपाने का खुलासाहमने देखा है कि राहुल गांधी नियमों का पालन नहीं करना चाहते हैं। वह सदन में सिर्फ बेबुनियाद मुद्दे लाना चाहते हैं, ऐसे टॉपिक जिनसे देश की बदनामी हो सकती है। उनका एजेंडा देश के हित में नहीं है, शायद वह विदेशी ताकतों के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। यह एक बार फिर साबित हो गया है कि राहुल गांधी को सदन की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बहुत ही डिटेल में बयान देकर देश को जानकारी दी है। मुझे उम्मीद है कि देशवासियों को भरोसा होगा कि चीजें कंट्रोल में हैं। घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कांग्रेस सांसदों पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यहां बैठकर चाय पीकर उन्होंने दिखा दिया है कि वे पार्लियामेंट को लेकर कितने सीरियस हैं।
ये भी पढ़ें शाहजहांपुर में कब्रिस्तान में घुसे पालतू कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला, पांच अज्ञात पर मुकदमा
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने तय कर लिया है कि हम नहीं सुधरेंगे। विपक्ष ने बताया कि एलओपी एलपीजी पर बोलना चाहते हैं। जब बोलने का मौका दिया तो गंभीरता नहीं थी। नोटिस देंगे, एलपीजी पर बोलेंगे; किसी और मुद्दे पर यह कैसे संभव है? राहुल गांधी जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं, जिससे टकराव की स्थिति पैदा हो। राहुल गांधी को समझना चाहिए कि यह सदन है, कांग्रेस पार्टी का ऑफिस नहीं कि आप कुछ भी कहेंगे। भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि विपक्ष सिर्फ पैनिक पैदा करना चाहता है; किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।
गैस की व्यवस्था है, देश मोदी के हाथों में सुरक्षित है, और कांग्रेस पार्टी पैनिक कर रही है। लोगों को कांग्रेस से बचना चाहिए। भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि राहुल गांधी को लोकतंत्र की गरिमा की कोई समझ नहीं है। वह जनता को गुमराह करने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन जनता सब जानती है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। यह शुरू से लगातार हो रहा है। राहुल गांधी बोलते हैं तो उनकी आवाज को दबा दिया जाता है। नियम के हिसाब से समय मांगा गया था, लेकिन उनकी बात को पूरा नहीं होने दिया गया। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि यही बात बार-बार उठाई गई है कि एलओपी को बोलने नहीं दिया जाता। जब भी वह कुछ कहने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, उन्हें हमेशा टोका जाता है। हमेशा यही होता। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में सांकेतिक प्रदर्शन का अपना महत्व होता है। नेता प्रतिपक्ष ने किया।
आप देखें तो एलपीजी के दाम बढ़ा दिए गए, गैस बुक करने के लिए लाइन लगी है, सांकेतिक प्रदर्शन का महत्व होता है, और पीयूष गोयल की समस्या है कि वह दूसरी दुनिया में रहते हैं। अमेरिका के साथ डील छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए हानिकारक है। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि सरकार कहती है कि एलपीजी की समस्या नहीं है, तो फिर गैस की बुकिंग में समस्या क्यों हो रही है? जिम्मेदारी किसकी है? इसकी जिम्मेदार भी कांग्रेस है क्या, हम बात उठाते हैं तो आवाज बंद कर दिया जाता है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि देश में एनर्जी का संकट है। राहुल गांधी ने सबूतों के साथ बात कही है। लेकिन, राहुल गांधी को रोक दिया जाता है, सच बोलने से कोई नहीं रोक सकता, वह लोगों को सच बताएंगे। लोग परेशान हैं, लेकिन वे कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि सदन सभी का है, लेकिन माइक सभी का नहीं है, यही तो समस्या है।
आज भी वही चीज रिपीट की गई है, माइक सत्ता पक्ष का है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जो विषय उठाया गया है, वह एक गंभीर विषय है। देश के लोग जानना चाहते हैं कि आर्थिक फैसले कहां से लिए जा रहे हैं। हम तेल कहां से खरीदेंगे यह तय भारत करेगा अमेरिका नहीं। अमेरिका के साथ कौन सी डील हुई है कि सारे फैसले अमेरिका कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति भारत के हक में फैसले नहीं कर रहे हैं। एलपीजी का संकट पैदा हुआ है, तो ऐसी स्थिति में देश के लोग सवाल कर रहे हैं कि देशहित में कौन फैसला लेगा। राहुल गांधी ने जैसे ही सदन में मुद्दा उठाया, तो माइक बंद कर दिया गया। सरकार जो कह रही है, वह बस ध्यान भटकाने के लिए कह रही है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि हम एक बार फिर देख रहे हैं कि जब विपक्ष के नेता बोलते हैं, तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। विपक्ष के नेता क्या बोल सकते हैं और क्या नहीं, इस पर सैकड़ों शर्तें लगाई जाती हैं, लेकिन हमें लगता है कि जब भी निशिकांत दुबे खड़े होते हैं, तो उनका माइक चालू कर दिया जाता है। वे कुछ भी कह सकते हैं, वे तस्वीरें भी दिखा सकते हैं। उन्हें इसकी इजाज़त कैसे मिलती है।
यह किस तरह की पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी है। निशिकांत दुबे के लिए कोई नियम क्यों नहीं हैं। वह तो मंत्री भी नहीं हैं। सरकार के दावों पर उन्होंने कहा कि कॉलेज के हॉस्टल बंद किए जा रहे हैं क्योंकि गैस सप्लाई नहीं है। मंत्री को बताना चाहिए था कि ऐसा क्यों हो रहा है। लोगों में बहुत पैनिक है, तो आप इसे कैसे सुलझाएंगे। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया। जिन इल्जामों को लेकर सरकार के पास अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, इल्जाम यही है कि वे विपक्ष के नेता को बोलने नहीं देते हैं।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां