हजारों करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: CBI ने मास्टरमाइंड डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को एयरपोर्ट से दबोचा
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और सीटीओ आयुष वार्ष्णेय को गेनबिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। यह मामला वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की गई कथित गेनबिटकॉइन पोंजी स्कीम से संबंधित है, जिसमें निवेशकों को मोटा मुनाफा का वादा करके धोखाधड़ी वाली क्रिप्टोकरेंसी योजना में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। निवेशकों से लिए गए पैसे का बाद में दुरुपयोग किया गया। इस मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406, 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत की जा रही है।
ये भी पढ़ें पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पश्चिमी एशिया के हालातों पर सरकार की अहम बैठक13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने गेनबिटकॉइन धोखाधड़ी से संबंधित इसी तरह के आरोपों के बारे में दर्ज एफआईआर की जांच सीबीआई को एक सामान्य जांच एजेंसी के रूप में करने का निर्देश दिया था। जांच के दौरान एमसीएपी नामक क्रिप्टो टोकन और संबंधित ईआरसी-20 स्मार्ट कॉन्ट्रेक्ट के डिज़ाइन, विकास और तैनाती में डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके सह-संस्थापकों जिनमें आरोपी आयुष वार्ष्णेय, साहिल बागला और निकुंज जैन शामिल हैं, की भूमिका सामने आई।
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डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने धोखाधड़ी वाली योजना के संपूर्ण तकनीकी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म, बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, कॉइन बैंक बिटकॉइन वॉलेट और गेन बिटकॉइन निवेशक वेबसाइट शामिल हैं। आरोपी के फरार होने के कारण लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। 9 मार्च को भारत छोड़ने का प्रयास करते समय मुंबई में इमिग्रेशन अधिकारियों ने आयुष वार्ष्णेय को रोक लिया और बाद में सीबीआई को सौंप दिया। इसके बाद काूननी प्रक्रिया के तहत सीबीआई ने आयुष को गिरफ्तार कर लिया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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