आलू किसान भूख की कगार पर…” संसद में इकरा हसन ने उठाया बड़ा मुद्दा
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन ने संसद के मौजूदा सत्र (मार्च 2026) के दौरान देश के अन्नदाता, विशेषकर आलू किसानों की दयनीय स्थिति पर सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश का आलू किसान आज 'भूख की कगार' पर खड़ा है और सरकार की नीतियां उन्हें राहत देने में विफल साबित हो रही हैं।
लागत से भी कम मिल रहे दाम
इकरा हसन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आलू की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन जब फसल बाजार में आती है, तो किसानों को उसकी सही कीमत नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में किसानों को आलू सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें कोल्ड स्टोरेज का किराया निकालने लायक दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं।
संसद में उठाए गए प्रमुख बिंदु:
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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): इकरा हसन ने मांग की कि आलू को भी एमएसपी के दायरे में लाया जाए या कोई ऐसा ठोस तंत्र बनाया जाए जिससे किसानों को लागत का कम से कम डेढ़ गुना दाम मिल सके।
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कोल्ड स्टोरेज की समस्या: उन्होंने कहा कि सरकारी कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण निजी मालिक किसानों का शोषण कर रहे हैं।
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निर्यात नीति: सांसद ने सरकार से आलू के निर्यात को बढ़ावा देने और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (प्रसंस्करण इकाइयों) को ग्रामीण स्तर पर स्थापित करने की अपील की ताकि आलू खराब न हो।
विपक्ष का मिला साथ
इकरा हसन के इस भाषण के दौरान विपक्ष के अन्य सांसदों ने भी मेजें थपथपाकर उनका समर्थन किया। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, जबकि जो किसान देश का पेट भरता है, वह आज खुद दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज है।
सरकार का पक्ष
वहीं, सरकार की ओर से संबंधित मंत्रियों ने आश्वासन दिया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और बाजार की कीमतों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, इकरा हसन ने इस आश्वासन को 'कागजी' बताते हुए धरातल पर ठोस कार्रवाई की मांग की है।
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