चंडीगढ़ ब्रांच फ्रॉड मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 645 करोड़ रुपए के दावे चुकाए
नई दिल्ली आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुए धोखाधड़ी मामले से जुड़े दावों के रूप में 645 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से लगभग 55 करोड़ रुपए ज्यादा है। बैंक ने यह भी कहा कि जांच के दौरान अब तक कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि पहले 590 करोड़ रुपए की मूल राशि का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में मिले दावों के आधार पर कुल 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। बैंक के अनुसार, यह सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं; कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: जानसठ समाधान दिवस में उमड़ी फरियादियों की भीड़, DM और SSP ने सुनीं जनता की समस्याएंबैंक ने यह भी बताया कि सभी संबंधित खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है और 25 फरवरी 2026 के बाद से देश भर में कोई नया दावा नहीं मिला है। बैंक ने कहा कि उसने अपने सिद्धांतों के अनुसार प्रभावित ग्राहकों को यह भुगतान किया है और आगे भी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा ताकि नुकसान की राशि की वसूली की जा सके। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस घटना के बावजूद बैंक की जमा राशि (डिपॉजिट बेस) स्थिर बनी हुई है। 28 फरवरी तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपए था, जबकि दिसंबर के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपए था। बैंक ने अपने ग्राहकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सिर्फ चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ी अलग घटना है।
बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) भी मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है। बैंक को उम्मीद है कि भविष्य में भी डिपॉजिट और लोन की वृद्धि पहले की तरह जारी रहेगी। इससे पहले बैंक ने बताया था कि हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले की जांच के लिए बैंक ने केपीएमजी को फॉरेंसिक ऑडिट सौंपा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट चार से पांच सप्ताह में आने की उम्मीद है। साथ ही जांच पूरी होने तक बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया है। घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां