ग्रेटर नोएडा का चर्चित सूबे हत्याकांड: कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
पुरानी रंजिश में रेलवे लाइन के पास युवक को मारी थी गोली, अवैध हथियार रखने के जुर्म में भी सजा
नोएडा। जनपद गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने दादरी थाना क्षेत्र के गांव बोड़ाकी में हुए बहुचर्चित 'सूबे हत्याकांड' में बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (राजेश कुमार मिश्रा) की अदालत ने दो आरोपियों, ईश्वर और गजेंद्र को हत्या और अवैध हथियार रखने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने बताया कि यह मामला 16 मार्च 2014 की रात का है। बोड़ाकी निवासी 23 वर्षीय सूबे खाना खाने के बाद रेलवे लाइन की ओर टहलने निकला था। उसी दौरान गांव के ही ईश्वर (पुत्र भंवर सिंह) और गजेंद्र (पुत्र घनश्याम) ने पुरानी रंजिश के चलते उसे घेर लिया। मृतक की बहन गीता और मां कमला ने आरोपियों को सूबे को 'निपटाने' की बात करते सुन लिया था। इससे पहले कि वे कुछ कर पातीं, ईश्वर ने अवैध तमंचे से सूबे पर पीछे से फायर कर दिया। अस्पताल में उपचार के दौरान सूबे की मौत हो गई थी।
पुलिस की प्रभावी पैरवी और बरामदगी
घटना के तीन दिन बाद, 19 मार्च 2014 को दादरी पुलिस ने एनटीपीसी तिराहे के पास से दोनों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त अवैध तमंचे और कारतूस बरामद हुए थे। एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने कोर्ट में मजबूत पैरवी की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान दर्ज कराए।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि गिरफ्तारी के वक्त कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, लेकिन अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल स्वतंत्र गवाह न होने से पुलिस की गवाही झूठी नहीं हो जाती। हालांकि, दोषियों का कोई पिछला आपराधिक इतिहास न होने के कारण इसे 'विरल से विरलतम' श्रेणी में नहीं माना गया, इसलिए मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास की सजा दी गई।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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