ईडी ने मस्ताना फूड्स के खिलाफ 88.58 करोड़ की 7 संपत्तियां कुर्क कीं, 152 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में फर्जी ट्रांजैक्शन का खुलासा
चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने मेसर्स मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ा एक्शन लिया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 88.58 करोड़ रुपए मूल्य की 7 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनली अटैच) कर लिया है। यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच का नतीजा है, जिसमें कंपनी और उसके निदेशकों पर लगभग 152.85 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। जांच में सामने आया कि मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2016-17 के दौरान अपने कारोबार को कृत्रिम रूप से बढ़ावा दिया।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: वैश्य समाज की एकजुटता पर जोर: अखिल भारतीय वैश्य महासंगठन ने घोषित की जिला कार्यकारिणीकंपनी ने फर्जी लेनदेन और शेल कंपनियों के जरिए फंड निकाले। मुख्य रूप से संबंधित कंपनियों के साथ धोखाधड़ी वाले सर्कुलर ट्रांजैक्शन किए गए। इनमें कंपनियां सप्लायर और कस्टमर दोनों की भूमिका निभाती थीं, जिससे बिना किसी वास्तविक व्यापार के बड़े पैमाने पर फंड का मूवमेंट और डायवर्जन हुआ। ईडी की जांच से पता चला कि कंपनी ने नकली खरीद-बिक्री इनवॉइस और फर्जी ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शेल फर्मों के नेटवर्क के माध्यम से फंड भेजा। पैसा जल्दी कंपनी को वापस लौटाया जाता था ताकि असली बिजनेस एक्टिविटी का दिखावा बना रहे। कई कर्जदार फर्में या तो अस्तित्व में नहीं थीं या सुरेश जैन जैसे बिचौलियों द्वारा नियंत्रित थीं, जिनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। इसके बाद कंपनी ने रिकवरी के बिना संदिग्ध कर्जों पर भारी प्रोविजन बनाए, जिससे निकाले गए फंड को बिजनेस लॉस दिखाया गया।
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पूरी स्कीम में ट्रांजैक्शन की लेयरिंग, पेपर ट्रेल्स बनाना, फंड की असली पहचान छिपाना और नकली फाइनेंशियल स्टेटमेंट पेश करना शामिल था। बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की गई। कोर्ट ने मेसर्स मस्ताना फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (एमएफपीएल) और उसके निदेशकों कृष्ण मोहन (कृष्ण मोहन मंदिरत्ता) और अनिल खुराना को एसबीआई के साथ धोखाधड़ी की साजिश रचने का दोषी ठहराया है। सीबीआई स्पेशल कोर्ट, पंचकूला ने उन्हें 2.5 वर्ष की सजा और 10,000 रुपए जुर्माना सुनाया था। मामला मूल रूप से राइस मिलिंग और पैराबॉइलिंग बिजनेस से जुड़ा था, जहां एसबीआई की चंडीगढ़ ब्रांच से लोन लिया गया और फंड का गलत इस्तेमाल हुआ।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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