जबलपुर: सिहोरा में दो समुदायों में जमकर पथराव, पुलिस ने छोड़े आंसूगैस, स्थिति तनावपूर्ण पर नियंत्रण में
जबलपुर। मध्य प्रदेश में सिहोरा तहसील में गुरुवार की देर रात दो समुदायों में विवाद हो गया। कहासुनी से शुरू हुआ विवाद दो समुदायों के बीच मारपीट में बदल गया। जिसके बाद दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने नियंत्रण करने हेतु लाठीचार्ज किया, परन्तु स्थिति बिगड़ती देख आंसूगैस के गोले दागे, जिससे भीड़ पर नियंत्रण हो सका।
बताया जाता है कि आज़ाद चौक में दुर्गा मंदिर और मस्जिद आमने सामने हैं। मंदिर में आरती चल रही थी उसी समय रमजान की विशेष नमाज तरावीह चल रही थी। इस दौरान बहस के बाद उपद्रव शुरू हो गया। आरोप है कि मंदिर की ग्रिल तोड़ी गई वहीं दूसरे पक्ष ने भी तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। शहर से अतिरिक्त बल सिहोरा भेजा गया है। गली गली में पुलिस की पेट्रोलिंग जारी है। चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है। सूचना पाकर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी संपत उपाध्याय भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस तथा प्रशासन के अनेक अधिकारी अभी भी डेरा डाले हुए हैं।
प्रशासन की ओर से जारी विग्यप्ति के अनुसार सिहोरा में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। गुरुवार की रात लगभग साढ़े नौ बजे दो पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस बल ने मौके पर पहुँच कर स्थिति पर काबू पा लिया था। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय भी मौके पर पहुँच गये थे। पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने बताया कि किसी भी धार्मिक स्थल को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। दोनों पक्षों से किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण में है एवं पर्याप्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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