मध्य प्रदेश गेहूं उपार्जन 2026-27 बड़ी तैयारी, 2585 रुपये MSP पर किसानों को मिलेगा सीधा लाभ, 7 मार्च तक पंजीयन जरूरी
मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026 27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि पंजीयन की प्रक्रिया 7 मार्च तक जारी रहेगी और जिन किसानों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है वे समय रहते यह काम पूरा कर लें।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार अब तक 1 लाख 81 हजार 793 किसान पंजीयन करा चुके हैं। सरकार का मानना है कि अंतिम तारीख नजदीक आते ही यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाएं मजबूत की जा रही हैं ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
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राज्य स्तर पर आंकड़े बताते हैं कि उज्जैन संभाग पंजीयन के मामले में सबसे आगे है जहां 73 हजार 398 किसानों ने आवेदन किया है। भोपाल संभाग में 41 हजार 268 और इंदौर संभाग में 27 हजार 175 किसानों ने पंजीयन कराया है।
जबलपुर संभाग में 12 हजार 342 किसान पंजीकृत हुए हैं जबकि नर्मदापुरम संभाग में 11 हजार 698 किसानों ने प्रक्रिया पूरी की है। सागर संभाग में 7 हजार 137 किसान जुड़े हैं।
ग्वालियर संभाग में 3 हजार 358 और रीवा संभाग में 3 हजार 242 किसानों ने पंजीयन कराया है। चंबल संभाग में 1 हजार 449 और शहडोल संभाग में 726 किसानों का नाम दर्ज हुआ है। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश भर में किसानों में जागरूकता बढ़ रही है।
2585 रुपये प्रति क्विंटल MSP से किसानों को राहत
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह दर पिछले विपणन वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। इसी दर पर पात्र किसानों से गेहूं खरीदा जाएगा। प्रदेश में कुल 3 हजार 186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं ताकि हर किसान आसानी से आवेदन कर सके।
निःशुल्क पंजीयन की सुविधा ग्राम पंचायत जनपद पंचायत तहसील कार्यालय और सहकारी समितियों के केंद्रों पर दी जा रही है। वहीं सशुल्क पंजीयन एमपी ऑनलाइन कियोस्क कॉमन सर्विस सेंटर लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे पर किया जा सकता है। प्रति पंजीयन शुल्क 50 रुपये से अधिक नहीं होगा।
विशेष श्रेणी के किसानों के लिए अलग व्यवस्था
सिकमी बटाईदार कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति और सहकारी विपणन संस्था के केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी। इन सभी का सत्यापन राजस्व विभाग करेगा। सरकार ने यह भी तय किया है कि पहले अपात्र घोषित किसी संस्था से जुड़े ऑपरेटर को फिर से पंजीयन कार्य में नहीं लगाया जाएगा।
दस्तावेज और आधार सत्यापन अनिवार्य
पंजीयन के समय भूमि दस्तावेज आधार कार्ड और फोटो पहचान पत्र का मिलान जरूरी है। किसान को बैंक खाता संख्या और IFSC कोड भी देना होगा। भू अभिलेख में दर्ज नाम और आधार कार्ड का नाम एक जैसा होना चाहिए। नाम में अंतर होने पर तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना अनिवार्य है।
पंजीयन और उपज विक्रय दोनों के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन जरूरी रखा गया है। यह प्रक्रिया OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस से की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पोस्ट ऑफिस के आधार सुविधा केंद्र का भी उपयोग किया जा सकता है।
भुगतान सीधे आधार लिंक खाते में
समर्थन मूल्य पर बेची गई उपज का भुगतान प्राथमिकता से आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। यदि किसी कारण से यह संभव नहीं होता तो पंजीयन के दौरान दिए गए अन्य बैंक खाते में राशि भेजी जाएगी। अक्रियाशील खाते संयुक्त खाते और फिनो एयरटेल या पेटीएम आधारित खाते मान्य नहीं होंगे।
राज्य आपूर्ति निगम ई उपार्जन पोर्टल के माध्यम से 1 रुपये का ट्रांजेक्शन कर आधार लिंक खाते की पुष्टि करेगा ताकि भुगतान में कोई अड़चन न आए। सरकार का लक्ष्य है कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी रहे और किसानों को उनकी मेहनत का पैसा सीधे और सुरक्षित मिले।
अंत में यही कहना जरूरी है कि जो किसान अभी तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं वे अंतिम तारीख से पहले यह प्रक्रिया जरूर पूरी करें ताकि गेहूं बेचते समय किसी तरह की परेशानी न हो।
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