MP NEWS: नागदा कोर्ट में KBC पर कानूनी परिवाद दर्ज, अमिताभ बच्चन और Sony TV के CEO को बनाया गया पक्षकार
मध्य प्रदेश के नागदा में टीवी शो को लेकर एक कानूनी मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लोकप्रिय क्विज शो Kaun Banega Crorepati के एक एपिसोड में प्रसारित कथित टिप्पणी को लेकर जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। इस शिकायत में शो के होस्ट Amitabh Bachchan और Sony Pictures Networks India के CEO को पक्षकार बनाया गया है। परिवादी पक्ष का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कही गई बात से आपत्ति उत्पन्न हुई और इस पर न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
क्या है पूरा मामला
जिला न्यायालय में दायर आवेदन के अनुसार KBC के एक एपिसोड में प्रसारित कथित टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रसारण के जरिए सार्वजनिक स्तर पर गलत संदेश गया। इसी आधार पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर किया गया। अदालत में जमा दस्तावेजों में प्रसारण की सामग्री और जवाबदेही का मुद्दा उठाया गया है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप परिवादी पक्ष के हैं। अदालत अभी मामले की प्रारंभिक जांच की अवस्था में है। अंतिम निष्कर्ष सुनवाई और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही तय होगा।
अदालत में आगे क्या होगी प्रक्रिया
नागदा जिला न्यायालय में प्रस्तुत यह मामला अब नियमित प्रारंभिक प्रक्रिया के दायरे में है। ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट पहले परिवाद की स्वीकार्यता आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हैं। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य आधार दिखाई देता है तो संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जा सकता है या बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यदि पर्याप्त आधार नहीं मिलता तो परिवाद खारिज भी किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार प्रसारण से जुड़े विवादों में अदालत यह देखती है कि कथित टिप्पणी किस संदर्भ में कही गई थी उसका सार्वजनिक प्रभाव क्या पड़ा और शिकायत में किस प्रकार की जिम्मेदारी बताई गई है। इन सभी पहलुओं के आधार पर आगे की दिशा तय होती है।
टीवी कंटेंट और जवाबदेही पर बहस
देश में बड़े टीवी शो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित सामग्री को लेकर समय समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। कई बार सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मुद्दा अदालत तक पहुंच जाता है। नागदा का यह मामला भी प्रसारण सामग्री की जवाबदेही से जुड़ा एक कानूनी परीक्षण माना जा रहा है। यहां शो के कंटेंट को न्यायिक मंच पर चुनौती दी गई है और अब आगे की कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
मीडिया कानून से जुड़े जानकार मानते हैं कि प्रसारण पर आपत्ति होने पर नियामकीय शिकायत पुलिस शिकायत या न्यायालयी परिवाद जैसे कई रास्ते उपलब्ध होते हैं। इस मामले में न्यायालयी प्रक्रिया को चुना गया है इसलिए अब अगला चरण अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
फिलहाल क्या है स्थिति
अभी मामला प्रारंभिक सुनवाई की अवस्था में है। अदालत यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोप किस हद तक सुनवाई योग्य हैं। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी आगे की प्रक्रिया में सामने आ सकती है। जब तक अदालत से कोई अंतिम आदेश नहीं आता तब तक इसे आरोपों और प्रारंभिक जांच वाला मामला ही माना जाएगा।
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