मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल 580 अस्पतालों में होनी चाहिए सीजर डिलिवरी सुविधा केवल 98 में मिल रही सेवा

मध्य प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर स्थिति सामने आई है। राज्य में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलिवरी के लिए जरूरी सुविधाओं की अभी भी कमी देखी जा रही है। खासकर जब किसी महिला की स्थिति गंभीर होती है तब तुरंत सीजर डिलिवरी की जरूरत पड़ती है।
लेकिन प्रदेश में अभी ऐसी सुविधा बहुत कम सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। इसी कारण कई बार गर्भवती महिलाओं को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है और कई परिवारों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
केवल 98 सरकारी अस्पतालों में ही 24 घंटे उपलब्ध है सुविधा
प्रदेश में शिशु और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए यह जरूरी माना जाता है कि गंभीर स्थिति में गर्भवती महिला की तुरंत सीजर डिलिवरी हो सके। इसके बावजूद स्थिति यह है कि राज्य के केवल 98 सरकारी अस्पतालों में ही चौबीस घंटे सीजर डिलिवरी की सुविधा उपलब्ध है।
ये भी पढ़ें मध्य प्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज, चार दिन आंधी-बारिश का अलर्ट, ग्वालियर-जबलपुर में बरसेंगे बादलजब किसी अस्पताल में यह सुविधा नहीं होती तब डॉक्टर मरीज को दूसरे अस्पताल में भेज देते हैं। इस प्रक्रिया में समय भी लगता है और कई बार परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी वजह
सीजर डिलिवरी के लिए कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत होती है। इसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञ की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।
प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इसी वजह से वहां सीजर डिलिवरी की सुविधा शुरू नहीं हो पाती और मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजना पड़ता है।
सरकार कर रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी कर रही है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डॉक्टरों की भर्ती के लिए सेवा शर्तों को अधिक आकर्षक बनाया जाए। सूत्रों के अनुसार सरकार अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती विभाग के माध्यम से करने की योजना बना रही है ताकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को जल्द पूरा किया जा सके।
कई अस्पतालों में होनी चाहिए सीजर डिलिवरी की सुविधा
नियमों के अनुसार सरकारी मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीजर डिलिवरी की सुविधा होनी चाहिए। प्रदेश में वर्तमान में 19 मेडिकल कॉलेज 55 जिला अस्पताल 158 सिविल अस्पताल और 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन सभी को जोड़कर करीब 580 अस्पताल ऐसे हैं जहां यह सुविधा होनी चाहिए लेकिन फिलहाल विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण केवल 155 अस्पतालों में ही यह व्यवस्था मौजूद है।
मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करना बड़ी चुनौती
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्रति हजार जीवित जन्म पर लगभग 37 शिशुओं की मौत एक वर्ष के भीतर हो जाती है। इसी तरह प्रति लाख प्रसव पर लगभग 142 माताओं की मृत्यु दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक शिशु मृत्यु दर को 10 और मातृ मृत्यु दर को 80 तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के हजारों पद अभी खाली
प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5443 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से लगभग 3948 पद अभी भी खाली हैं। वर्तमान में केवल 1495 विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं। छोटे जिलों में स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण है जहां डॉक्टरों की कमी के कारण कई स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सरकार का प्रयास है कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया को तेज करके इस कमी को दूर किया जाए।
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