मैनपुरी में बाबा रामदेव का बड़ा बयान, एप्सटिन फाइल और ‘टापू कांड’ से जुड़ा दुनिया का खेल

मैनपुरी। योग गुरु बाबा रामदेव ने उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वैश्विक राजनीति और अनैतिकता के गठजोड़ पर कड़ा प्रहार किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित 'जेफरी एप्सटिन फाइल्स' और तथाकथित 'टापू कांड' का उल्लेख करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि दुनिया के ताकतवर लोग किस तरह की गंदगी और षड्यंत्रों में शामिल हैं, इसका खुलासा अब सबके सामने हो रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को मानवीय मूल्यों का पतन बताते हुए भारतीय संस्कृति और सात्विक जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया।
वैश्विक नेतृत्व के चरित्र पर सवाल
मैनपुरी पहुंचे बाबा रामदेव ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि एप्सटिन जैसे मामलों ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के बड़े-बड़े नामी लोग और ताकतवर देशों के नेता एक बंद टापू पर अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। उन्होंने इसे 'दुनिया का खेल' करार देते हुए कहा कि जो लोग दुनिया को नैतिकता और मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाते हैं, वे खुद किस हद तक गिरे हुए हैं, यह 'एप्सटिन फाइल' से साफ हो गया है। बाबा रामदेव ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिमी सभ्यता की इन कुरीतियों का प्रभाव भारत पर बढ़ा, तो यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए घातक होगा।
भारतीय संस्कृति को बताया सुरक्षा कवच
बाबा रामदेव ने कहा कि 'टापू कांड' जैसी घटनाएं आधुनिकता के नाम पर परोसी जा रही विकृति का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति जैसी अनमोल विरासत है, जो व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाहरी चमक-धमक और पश्चिमी देशों के कथित बड़े चेहरों के पीछे छिपी असलियत को पहचानें और अपने संस्कारों से जुड़े रहें। योग गुरु ने जोर देकर कहा कि चरित्र की पवित्रता ही किसी राष्ट्र को महान बनाती है, न कि केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति।
भ्रष्टाचार और अनैतिकता के खिलाफ एकजुटता की अपील
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केवल वैश्विक ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर भी शुचिता की बात की। उन्होंने कहा कि जब तक नेतृत्व और समाज चरित्रवान नहीं होगा, तब तक कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने एप्सटिन केस को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए बताया कि कैसे सत्ता और पैसे के नशे में डूबे लोग मानवता के साथ खिलवाड़ करते हैं। मैनपुरी की जनता ने बाबा रामदेव के इन विचारों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
योग और सात्विकता का संदेश
अपने संबोधन के अंत में बाबा रामदेव ने लोगों को नियमित योग करने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन को भी विकारों से मुक्त रखता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति के बल पर दुनिया को सही रास्ता दिखाएगा और एप्सटिन जैसे 'गंदे खेलों' से मानवता को बचाने का कार्य करेगा।
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