यूपी सरकार का बड़ा फैसला: वृद्धावस्था पेंशन के लिए अब आधार कार्ड की जन्मतिथि अमान्य, आयु प्रमाण पत्र हुआ अनिवार्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के नियमों में रातों-रात बड़ा बदलाव करते हुए लाभार्थियों के लिए नई शर्तें लागू कर दी हैं। शासन द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, अब पेंशन का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड पर अंकित जन्मतिथि को आयु के साक्ष्य (Age Proof) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर अब लाभार्थियों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आयु प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा।
आधार कार्ड क्यों हुआ अमान्य?
अपर मुख्य सचिव एल. वेंटेश्वर लू द्वारा 12 मार्च 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के क्षेत्रीय कार्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड केवल पहचान का दस्तावेज है, न कि जन्मतिथि का पुख्ता प्रमाण। इसी के आधार पर समाज कल्याण विभाग ने पेंशन के मानकों में बदलाव किया है। अब आवेदन के समय आधार की जन्मतिथि के बजाय अन्य आधिकारिक दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कौन से दस्तावेज होंगे मान्य?
पेंशन योजना का लाभ जारी रखने या नया आवेदन करने के लिए अब निम्नलिखित में से कोई एक प्रमाण पत्र होना आवश्यक है:
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हाईस्कूल की मार्कशीट या सर्टिफिकेट।
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नगर निकाय या ग्राम पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
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सरकारी अस्पताल के सीएमओ (CMO) द्वारा जारी किया गया आयु प्रमाण पत्र।
पेंशनभोगियों पर असर और नई गाइडलाइंस
इस नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन बुजुर्गों पर पड़ेगा जिन्होंने केवल आधार कार्ड के आधार पर अपनी उम्र 60 वर्ष दिखाई थी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन पत्र के सभी कॉलम भरना अब अनिवार्य होगा और दस्तावेजों के सत्यापन के बिना पेंशन की अगली किस्त जारी नहीं की जाएगी। सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से अपात्र लोगों को योजना से बाहर करने और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।
विभागीय सख्ती और सत्यापन
प्रदेश के सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए आवेदनों में आयु प्रमाण पत्र की गहनता से जांच करें। जिन मौजूदा लाभार्थियों की आयु को लेकर संदेह है, उनका भी पुन: सत्यापन कराया जा सकता है। सरकार ने यह कदम पेंशन वितरण प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने और बजट का सही पात्रों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया है।
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