सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय की जमीन पर मचा सियासी घमासान, दोबारा पैमाइश के लिए मौके पर पहुंचे डीएम
मुरादाबाद। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय की जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को प्रशासन ने विद्यालय के लिए आरक्षित सरकारी भूमि को खाली कराने के लिए बुलडोजर चलाकर बाउंड्री ध्वस्त कर दी थी। इस कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ गया और मुरादाबाद से लेकर Lucknow तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और जमीन की दोबारा पैमाइश कराने का निर्णय लिया गया।
शुक्रवार सुबह होते ही जिलाधिकारी Anuj Singh स्वयं तहसील की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जमीन की दोबारा पैमाइश कराने के निर्देश दिए। इस दौरान सदर और बिलारी तहसील की पूरी टीम मौके पर मौजूद रही और भूमि के अभिलेखों के आधार पर सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कराई गई।
दरअसल, विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि जिस जमीन को प्रशासन सरकारी बताते हुए खाली करा रहा था, उस पर बाउंड्री कराने वालों में सत्ताधारी दल के मेयर Vinod Agarwal और खुद को भाजपा के एक प्रभावशाली नेता का करीबी बताने वाले अमित चौधरी का नाम सामने आया। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।
मेयर विनोद अग्रवाल ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत शासन स्तर पर कर दी है। उनका आरोप है कि बिना पूरी जांच के कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में सदर उपजिलाधिकारी Dr. Ram Mohan Meena के खिलाफ कार्रवाई कराए बिना नहीं रुकेंगे।
ये भी पढ़ें छूट न जाए आपका वोट, अभी जांच लें मतदाता सूची, डीएम बोले- 27 मार्च तक दर्ज कराएं दावा-आपत्तिशुक्रवार को जब दोबारा पैमाइश शुरू हुई तो मेयर विनोद अग्रवाल भी मौके पर पहुंच गए। उनके साथ उनकी निजी टीम भी मौजूद रही, जो समानांतर रूप से जमीन की नापजोख कर रही थी। मेयर का दावा है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है, वह उनकी निजी संपत्ति है और उन्होंने इसे करीब दस वर्ष पहले चांद बाबू से खरीदा था।
बताया जा रहा है कि चांद बाबू का नाम पहले भी हाईवे किनारे की विवादित जमीनों को लेकर चर्चा में रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह कई स्थानों पर डंपरों से मिट्टी डलवाकर जमीन को हाईवे बाईपास के स्तर तक भरवाने की कोशिश करता रहा है, ताकि उस पर कब्जा किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में इस समय चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, वहीं चांद बाबू द्वारा रात-दिन डंपरों से मिट्टी डालकर जमीन समतल करने का काम किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ चकबंदी अधिकारी और एक लेखपाल की मिलीभगत से आसपास की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिशें की जा रही हैं।
ग्रामीणों ने इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण चांद बाबू के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि चांद बाबू ने आजाद समाज पार्टी के टिकट पर कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव भी लड़ा था।
फिलहाल प्रशासन द्वारा दोबारा पैमाइश कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस पूरे मामले ने जिले में प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां