भोपाल में कुत्ते ने बढ़ाई अधिकारियों की मुसीबत भेल के कर्मचारी 8 दिन तक सड़कों और खेतों में ढूंढते रहे कुत्ते

भोपाल से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कॉलोनी में एक आवारा कुत्ते को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि कई जिम्मेदार लोगों की जिंदगी कुछ दिनों के लिए पूरी तरह बदल गई।
कॉलोनी से आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला कुछ कर्मचारियों के लिए इतना भारी पड़ गया कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी तक सड़कों और खेतों में कुत्ते की तलाश करते हुए बितानी पड़ी। यह घटना इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
ये भी पढ़ें MP Board Result 2026 कॉपी जांच लगभग पूरी अब इस तारीख तक जारी हो सकता है 10वीं 12वीं का रिजल्टकॉलोनी से कुत्तों को हटाने का फैसला पड़ा भारी
भोपाल के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में रहने वाले कुछ लोगों ने कॉलोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला लिया था। इसी दौरान एक कुतिया को भी कॉलोनी से भगा दिया गया जिसे एक महिला रोज खाना खिलाया करती थी।
जब उस महिला को यह बात पता चली तो वह काफी दुखी हो गई। इसके बाद उसने कॉलोनी के पदाधिकारियों के खिलाफ कई जगह शिकायतें भेज दीं। शिकायतें भेल प्रबंधन पुलिस आयुक्त नगर निगम और यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गईं।
मेनका गांधी तक पहुंचा मामला
यह मामला धीरे धीरे इतना बड़ा हो गया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तक भी इसकी जानकारी पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने भी इस मामले को लेकर पत्र लिखा। शिकायतें बढ़ने के बाद प्रशासन और भेल प्रबंधन दोनों सक्रिय हो गए। इससे कॉलोनी के अध्यक्ष सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गईं और उन पर लगातार दबाव बनने लगा।
छुट्टी लेकर शुरू हुआ कुत्ते को खोजने का ऑपरेशन
मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों को कुत्ते को ढूंढने के लिए कहा। इसके बाद कॉलोनी के पदाधिकारी और भेल के कर्मचारी छुट्टी लेकर कुत्ते को ढूंढने में लग गए।
करीब आठ दिनों तक वे शहर की सड़कों और आसपास के खेतों में कुत्ते को खोजते रहे। उस समय पूरा शहर होली भाईदूज और रंगपंचमी के त्योहार में व्यस्त था लेकिन ये लोग कुत्ते की तलाश में इधर उधर भटकते रहे।
नॉन वेज का लालच देकर पकड़ा गया कुत्ता
कई दिनों तक खोजने के बाद सातवें दिन कुत्ता एक दूर इलाके के खेतों में दिखाई दिया लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। इसके बाद उसे पकड़ने के लिए कर्मचारियों ने एक अलग तरीका अपनाया। वे बिस्कुट ब्रेड और मछली मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे ताकि उसे खाने का लालच देकर पकड़ा जा सके। आखिरकार लगातार कोशिश के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर कॉलोनी में वापस लाया गया।
मामला शांत होने के बाद मिली राहत
जब कुत्ते को वापस कॉलोनी में लाया गया तब जाकर शिकायत करने वाली महिला का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने भी इस मामले की फाइल बंद कर दी। अब कॉलोनी के लोग आपस में यह कहते नजर आ रहे हैं कि कुत्तों को कॉलोनी से बाहर निकालना आसान था लेकिन कानून और शिकायतों के दबाव से बचना बेहद मुश्किल हो गया।
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