तमिलनाडु की लड़की के सपनों ने भरी उड़ान, बनीं आईएएफ की सबसे युवा फ्लाइंग ऑफिसर

चेन्नई। तमाम बाधाओं-चुनौतियों को पार कर तमिलनाडु की एक लड़की ने शनिवार को जब उड़ान भरी तो वह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की सबसे युवा फ्लाइंग ऑफिसर बन गई। उस लड़की की उम्र का हालांकि अभी पता नहीं है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि बातचीत के लिए फिलहाल वह उपलब्ध नहीं है।
फ्लाइंग ऑफिसर आर पोनशर्मिनी की कहानी दृढ़ता, लचीलेपन और अटूट सपनों के उड़ान की कहानी है। तमिलनाडु के दक्षिणी तिरुनेल्वेली जिले में जन्मी और चेन्नई में पली-बढ़ी पोनशर्मिनी बेहद साधारण घराने से आती हैं। उनके माता-पिता दोनों सिलाई का काम करते हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि मां-बाप की कुर्बानियों की वजह से बचपन से ही पोनशर्मिनी में कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का जज्बा पैदा हो गया था।
विद्यालय और महाविद्यालय के दिनों में खिलाड़ी और एनसीसी कैडेट रही पोनशर्मिनी का शुरुआती लक्ष्य पेशेवर खिलाड़ी बनने का था। मगर वित्तीय कठिनाइयों के कारण उन्हें अपना सपना छोड़ खुद को पढ़ाई पर केंद्रित करना पड़ा। परिवार पर बोझ न पड़े इसके लिए उन्होंने बच्चों को पढ़ाने से लेकर टूर गाइड तक की अंशकालिक नौकरियां भी की। इसमें उन्हें मिली छात्रवृत्तियों ने भी मदद की।
स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने एक फर्म में नौकरी की। जहां वह सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारियों की सहयोगी थीं। उनके सानिध्य और प्रेरणा ने पोनशर्मिनी की वर्दी पहनने के बचपन के सपने को फिर से जगा दिया। पोनशर्मिनी की कड़ी मेहनत अंतत: साकार हुई। उनकी हिम्मत ने उन्हें भारतीय वायु सेना का हिस्सा बना ही दिया।
उनकी मेहनत, प्रतिबद्धता और समग्र प्रदर्शन के कारण उन्हें तेलंगाना के डुंडिगल में वायु सेना अकादमी का इसी साल ऑटमन सत्र का महिला कैडेट कप्तान (डब्लूसीसी) नियुक्त किया गया और आज (13 दिसंबर, 2025) उनका ऑफिसर बनने का सपना तब पूरा हुआ, जब उन्हें संयुक्त स्नातक परेड में कमीशन मिला।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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