मुजफ्फरनगर: खाद के साथ जबरन थमाया दूसरा सामान तो खैर नहीं! DM उमेश मिश्रा के सख्त निर्देश— "विक्रेताओं पर दर्ज होगा मुकदमा"

मुजफ्फरनगर। किसानों के हितों की रक्षा और मिट्टी की उर्वरता को बचाने के लिए जिला प्रशासन अब 'एक्शन मोड' में है। विकास भवन सभागार में आयोजित 'उर्वरक एवं धरती माता बचाओ निगरानी समिति' की बैठक में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने उर्वरक विक्रेताओं को दोटूक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद की कालाबाजारी या किसानों पर जबरन अन्य उत्पाद थोपने वाले विक्रेताओं को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सीधे FIR दर्ज कराई जाएगी।
⚖️ कालाबाजारी करने वालों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
जिलाधिकारी ने खाद वितरण में पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा:
-
मुकदमा और कार्रवाई: यदि कोई विक्रेता उर्वरक के साथ नैनो यूरिया या अन्य कीटनाशक जबरन बेचता पाया गया, तो संबंधित कंपनी, थोक व्यापारी और रिटेलर तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।
-
टॉप-20 लिस्ट पर नज़र: जो विक्रेता बिक्री में गड़बड़ी के कारण 'टॉप 20' की सूची में आएंगे, उनकी गहन जांच की जाएगी।
-
नियम मानने वालों को डर नहीं: DM ने आश्वस्त किया कि नियमों के तहत काम करने वाले ईमानदार विक्रेताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
🌱 'किसान पंजीकरण' के बिना नहीं मिलेगी खाद
अब खाद की बिक्री पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी:
-
फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य: आगामी सत्र से किसानों को उनकी भूमि के विवरण और 'किसान पंजीकरण' के आधार पर ही उर्वरक मिल सकेगा।
-
किसान सहायक ऐप: विक्रेताओं को 'किसान सहायक यूपी' एप्लीकेशन के माध्यम से पंजीकरण करने का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि दुकानों पर ही किसानों का रजिस्ट्रेशन हो सके।
🧪 रासायनिक खेती छोड़ जैविक अपनाने पर जोर
जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने रसायनों के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया:
-
जागरूकता गोष्ठियां: विक्रेताओं को सप्ताह में एक दिन किसानों के लिए गोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
-
विकल्प: किसानों को गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, हरी खाद (ढैंचा, सनई) और जैव उर्वरकों (राइजोबियम) के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।
-
फसल अवशेष: पराली या अवशेष जलाने के बजाय उन्हें मिट्टी में मिलाकर खाद बनाने की सलाह दी गई।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

टिप्पणियां