नैनीताल। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के मामले प्रमुख सचिव वन तथा प्रबंध निदेशक (एमडी) वन विकास निगम को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जबाव पेश करने को कहा है । इस मामले में सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ में हुई। मामले के अनुसार वन विकास निगम में चौकीदार व स्केलर के पद पर वर्ष 1987 में तैनात लगभग डेढ़ हजार कार्मिकों का वर्ष 1991 से 2002 के बीच नियमितीकरण हुआ और उन्हें नियमानुसार वेतन भत्ते अनुमन्य हुए लेकिन वर्ष 2017 में हुए ऑडिट के बाद इन कार्मिकों से वसूली (रिकवरी) शुरू कर दी गई। सरकार की ओर से 10 से 12 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए।
इन कार्मिकों की ओर से सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई जिसकी सुनवाई के बाद फरवरी 2025 में रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया और सरकार को आदेश दिया है कि तीन महीनों के भीतर इन कार्मिकों को सभी लाभ दें।
आगे कहा गया कि कई माह बीत जाने के बाद भी विभाग ने इन कार्मिकों से वसूली आदेश वापस नहीं लिया जिसके खिलाफ ललित चन्द्र तिवारी व अन्य ने अवमानना याचिक दायर की। जिस पर हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है।