यूपी में 'वोटों की सफाई' या सियासी भूचाल ? मुज़फ्फरनगर शहर में कटे 62,500 हिंदू वोट, संगठन की कोशिशें भी नहीं आईं काम ?
मुज़फ्फरनगर (Muzaffarnagar)। (रॉयल बुलेटिन ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने वह कर दिखाया है जिसकी आहट से ही राजनीतिक गलियारे सहमे हुए थे। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार, पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक सफाई की गवाही दे रहा है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव के समीकरणों को भी पूरी तरह से पलटने की क्षमता रखता है।
योगी जी के निर्देश और ज़मीनी हकीकत सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संभावित कटौती की गंभीरता को पहले ही भांप लिया था। उन्होंने पार्टी संगठन और पन्ना प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि घर-घर जाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। लेकिन परिणाम इसके उलट आए। पूरे उत्तर प्रदेश में जहाँ 2.89 करोड़ वोट कटे, वहीं भाजपा की इतनी बड़ी सक्रिय फौज होने के बावजूद मात्र 7 लाख नए वोट ही जुड़ पाए।
राजनीतिक गलियारों में उठते सवाल:
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क्या पन्ना प्रमुख और बूथ लेवल एजेंट (BLA) अपने वोटरों का सत्यापन कराने में सुस्त रहे?
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92,450 में से 62,500 हिंदू वोटों का कटना क्या किसी बड़ी तकनीकी चूक का परिणाम है या संगठन की लापरवाही?
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मात्र 7 लाख नए वोट जुड़ना क्या यह दर्शाता है कि संगठन और जनता के बीच का संवाद कमज़ोर हुआ है?
औसतन हर विधानसभा सीट पर 60 से 72 हज़ार वोट कम हुए हैं। मुज़फ्फरनगर शहर में 62 हज़ार से ज़्यादा हिंदू वोटरों का कटना जीत-हार के अंतर (Margin) को पूरी तरह बदल सकता है। अब 6 फरवरी 2026 तक का समय राजनीतिक दलों के लिए 'करो या मरो' जैसा है, क्योंकि इसके बाद अपनी ग़लती सुधारने का मौक़ा नहीं मिलेगा।
निर्वाचन विभाग ने साफ़ किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम कटे हैं, वे 6 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। अब देखना यह है कि क्या अगले एक महीने में राजनीतिक दल इन कटे हुए वोटों को वापस जोड़ पाएंगे या यह 'सियासी भूचाल' चुनावी नतीजों को ही बदल देगा।
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