यूपी में वोटर लिस्ट से कटे 2 करोड़ 89 लाख नाम, भड़का पक्ष, बोला...कैसे ?
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मंगलवार को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद प्रदेश के करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
योगी जी का 'संगठन' और 7 लाख का सच विपक्ष का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद संगठन के कार्यकर्ताओं और 'पन्ना प्रमुखों' को नाम जुड़वाने के काम में लगाया था, तो फिर पूरे प्रदेश में केवल 12 लाख नए वोट ही क्यों जुड़ पाए? विपक्ष का आरोप है कि संगठन का काम नाम जोड़ना नहीं, बल्कि 'विपक्षियों के नाम कटवाना' था।
क्या कहता है निर्वाचन आयोग? यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, जो 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं, उनमें:
-
46.23 लाख: मृतक मतदाता।
-
2.17 करोड़: स्थाई रूप से स्थानांतरित या गायब (Shifted/Missing)।
-
25.47 लाख: डुप्लीकेट वोटर्स (एक से अधिक जगह नाम)।
कांग्रेस का भी कड़ा रुख कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और वरिष्ठ नेताओं ने भी इसे जल्दबाजी में की गई प्रक्रिया बताया है। कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल जैसे कई दिग्गजों के नाम भी लिस्ट से गायब मिले हैं, जिसे लेकर पार्टी अब सड़क से लेकर चुनाव आयोग तक विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।
अंतिम मौका: निर्वाचन आयोग ने साफ़ किया है कि यह केवल ड्राफ्ट है। 6 फरवरी तक पात्र लोग अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष अपने वोटरों को दोबारा लिस्ट में ला पाता है या भाजपा का 'क्लीन अप' अभियान 2027 की राह आसान कर देगा।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन उत्तर भारत का प्रमुख हिंदी दैनिक है, जो पाठकों तक स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय खबरें तेज़, सटीक और निष्पक्ष रूप में पहुँचाता है, हिंदी पत्रकारिता का एक भरोसेमंद मंच !
